Adamkhor

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-485-5

Author:RAMASHANKAR NISHESH

Pages:104

MRP:Rs.195/-

Stock:In Stock

Rs.195/-

Details

आदमखोर

Additional Information

आदिकाल में मनुष्य जंगलों में रहता, पशु-पक्षियों का शिकार करता, अपना जीवन-निर्वाह करता, यही जानवर प्रायः उस पर भी समय-समय पर हमला कर देते थे। इसलिए अपनी प्राण रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहना होता एवं सदैव ही सुरक्षित स्थानों की खोज में रहता था। सारांश में बिना आत्मबल एवं कठिन परिश्रम के धरती पर जीवन सम्भव नहीं था। इसलिए ये वृद्ध एवं बच्चों को छोड़ सभी सामूहिक रूप से काम करते और अधिक-से-अधिक परिश्रम करते, उसकी इस सामूहिक रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति ने कुछ चालाक एवं चतुर लोगों ने अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए उसे अपनी दास्ता की बेड़ियों में जकड़ स्वयं को उस पर हावी होकर उसे इस्तेमाल करने लगा। इस तरह मनुष्य दो भागों में बँट गया​ - ​शोषक एवं शोषित।​

About the writer

RAMASHANKAR NISHESH

RAMASHANKAR NISHESH रमाशंकर निशेश सन् 1931 में जन्मे रमाशंकर निशेश रंगमंच के एक सुपरिचित नाटककार हैं। कुछ समय स्नातक के रूप में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में रहे। इलाहाबाद नाट्य संघ द्वारा इनके कई नाटकों को पुरस्कृत किया गया। साहित्य कला परिषद् दिल्ली द्वारा नाटक 'आदमखोर' सर्वोत्तम नाट्य-लेखन के लिए प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत तथा दिल्ली नाट्य संघ द्वारा 1983 में रंगमंच में उनकी विशेष सेवाओं के लिए सम्मानित होने के साथ ही उन्हें वर्तमान में आठवाँ नटसम्राट सम्मान 2016 से भी सम्मानित किया गया। रंगमंच से पूर्णतया जुड़े रहने के कारण उनके सभी नाटक मंचनीय हैं रचनाएँ : आदमखोर; कुक्कू डार्लिंग; कोठा; अमीबा; अपभ्रंश; प्यार कैसे होता है; महासम्मेलन; सीपियाँ; मेमो; अपनी डफली, अपना राग; कुत्ता किसका है; डूबा वंश कबीर का।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality