Buddha

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-500-5

Author:MANIK MUNDE

Pages:256

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

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बुद्ध ने नास्तिक को भी धार्मिक होने का मार्ग खोला,यह अपूर्व क्रांति है। बुद्ध ने कहा, “नास्तिक हो; ठीक है, भले हो, आओ, क्योंकि ध्यान करने में तो नास्तिक को भी बढ़ा नहीं हो सकती है।” बुद्ध अनूठे हैं। ध्रुवतारे हैं। तारे तो बहुत हैं लेकिन ध्रुव तारा एक ही है। बुद्ध के साथ मनुष्य की चेतना के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपार हुआ है। जी किनारे खड़े होकर सागर की गहराई के संबंध में जो केवल वर-प्रतिवाद कर रहें हैं और मात्र आलोचना में धन्यता मान रहें हैं, उनसे ‘बुद्ध सागर में डुबकी लगाकर गहराई बन जाने का यह किताब निवेदन करती है।

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