Yadon Ka Shantiniketan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-588-3

Author:MANORAMA BISHWAL MAHAPATRA

Pages:64

MRP:Rs.225/-

Stock:Out of Stock

Rs.225/-

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यह पुस्तक अस्तित्व की खोज,स्थानीयता और सीमाबद्धता की बेड़ियों की जकड़न से मुक्त एक ऐसी संरचना है जिसमे पाठक को अपना अश्क दिखाई देता है। इस पुस्तक में यादें,शान्ति,प्रेम, और अपनेपन की महक नज़र आएगी।

About the writer

MANORAMA BISHWAL MAHAPATRA

MANORAMA BISHWAL MAHAPATRA काव्य और कला की सारस्वत तीर्थ भूमि शान्तिनिकेतन की छात्रा थीं डॉक्टर विश्वाल महापात्रा। काव्य-जिज्ञासा, जो उन्हें आतुर करती रही है; आपके काव्य संग्रहों में ‘थरे खालि डाकिदेले’, ‘स्वातीलग्न’, ‘एकला नईर गीत’, ‘जन्हरातिर मुँह’, ‘शब्दर प्रतिमा’, ‘फाल्गुनि तिथिर झिअ’, ‘विश्वासर पर्बिंन’ निरवंचित कविताएँ आदि में उस अन्वेषा की तन्मयता देखी जा सकती है। उनकी एक स्वतन्त्रा दिशा है अभिव्यक्ति की जिससे ओड़िआ सर्जनात्मक कविता के क्षेत्रा में श्रीमती मनोरमा विश्वाल महापात्रा एक सार्थक तथा आदरणीय नाम है। श्रीमती महापात्रा के संग्रह हिन्दी, बांग्ला, तमिल तथा अंग्रेजी में अनूदित हुए हैं। कविता के लिए ओड़िशा साहित्य अकादेमी तथा अन्य अनेक सम्मानों से अलंकृत हुई हैं। मनोरमा विश्वाल महापात्रा की कविताएँ ग्रामीण परिवेश और लोक संस्कृति के प्रति गहरा प्रेम दर्शाती हैं। 27 नवम्बर, 1948, प्रथाष्टमी के दिन बालेश्वर के सागर तटवर्ती ‘जगाई’ में जन्मी कवि मनोरमा अब भी तपस्यालीन हैं। सम्पर्कः ‘प्रीतमपुरी’, 125, आचार्य विहार, भुवनेश्वर- 751013, ओड़िशा।

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