Haath Ki Lakeeren

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-472-2

Author:Bhaichand Patel

Pages:208

MRP:Rs.300/-

Stock:In Stock

Rs.300/-

Details

हाथ की लकीरें

Additional Information

· रवि का हँसता-खेलता हुआ बचपन अचानक ही एक दिन ख़त्म हो गया था जब उसने रात और सुबह की सन्धिवेला में अपनी माँ को एक ट्रक में चढ़ते हुए देखा। रोग से जर्जर अपने पिता महेश के साथ परित्यक्त रवि लगभग एक आहत अवस्था में युवावस्था की दहलीज़ की ओर बढ़ता है और अपने को पहले से एक बड़ी और बुरी दुनिया में पाता है। असहनीय दरिद्रता के माहौल में अपना जीवन बसर करते हुए महेश और रवि एक सँकरी-सी जगह में दया और आश्रय पाते हैं। हालाँकि पिता और पुत्र के बिछोह की तुलना में ऐसी कठिनाइयाँ फिर भी काफी सुकून देने वाली हैं। अपनी नियति और प्रसिद्धि की अनजानी राहों पर यात्रा करता हुआ रवि मुम्बई जैसे बड़े शहर में आ जाता है। · महानगर की चहल-पहल और शोरगुल के बीच धीरे-धीरे रवि अपने अतीत से दूर होता जाता है और अपनी सारी ऊर्जा बॉलीवुड के एक सफल संगीतकार के रूप में अपना भविष्य सँवारने में लगा देता है। जब वह धारावी के अपने मधुर दिनों से जुहू के सपनों की ओर मुड़ता है तो वहाँ के गाढ़े दिनों में उसकी दृढ़ता और होशियारी ही उसके काम आती है। जल्दी ही वह पाली हिल में रहकर अपने सपनों को जीने लगता है। उसकी भेंट सन्ध्या से होती है जो एक सुन्दर, सम्भ्रान्त, शिक्षित और नुमायाँ युवती है, जिससे उसका विवाह तय होता है। लेकिन सहसा जब एक दिन रेलवे की पटरियों पर एक लाश मिलती है तो रवि का भरा-पूरा अस्तित्व पुलिस की खोजबीन से हिलने लगता है। पुलिस की जाँच उसके अतीत तक चली जाती है। · भाईचन्द पटेल का यह पहला उपन्यास ‘हाथ की लकीरें’ एक ऐसे युवक की जीवन-गाथा है जिसमें निर्धनता से समृद्धि की ओर एक यात्रा है और खोये हुए बचपन की स्मृतियों के चित्र हैं। ये स्मृतियाँ और ये यात्राएँ कभी क्रमानुसार और कभी व्यतिक्रमानुसार एक साहसी यात्री के अगले पड़ाव की दिशा में बढ़ती रहती हैं।

About the writer

Bhaichand Patel

Bhaichand Patel भाईचन्द पटेल का बचपन फ़िजी में बीता है और इन्हें वहाँ की नागरिकता भी हासिल है। वे गुजराती, भोजपुरी, हिन्दी और अंग्रेज़ी भी बोलते हैं। उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (दिल्ली विश्वविद्यालय),गवर्नमेंट लॉ कॉलेज (बम्बई विश्वविद्यालय) और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अपनी पढ़ाई पूरी की है। वे बम्बई हाई कोर्ट में बैरिस्टर भी रहे हैं। 1971 से उन्होंने यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर्स, न्यूयॉर्क में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। 1997 से वे दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने अब तक पाँच पुस्तकें लिखी हैं जिनमें ‘चेंज़िंग द गुड लाइफ’, ‘हैप्पी आवर्स’, ‘बॉलीवुड्स टॉप ट्वेन्टी सुपरस्टार्स ऑफ़इंडियन सिनेमा’ काफ़ी चर्चित हैं। ‘मदर्स, लवर्स एंड अदर स्ट्रैंजर्स’ उनका पहला उपन्यास है जिसका हिन्दी अनुवाद ‘हाथ की लकीरें’ है।

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