Dai

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-600-2

Author:TEKCHAND

Pages:72

MRP:Rs.195/-

Stock:In Stock

Rs.195/-

Details

दाई जीवन देने वाली, जीवन जगाने वाली, दुनिया में आये इंसान को पहली इंसानी छुअन देने वाली, इंसानी अहसास से रूबरू करवाने वाली दाई! अथक परिश्रम, धैर्य, जीवन के प्रति संवेदना, तमाम विषमताओं के बीच से जीवन कमल को निकाल लाना साफ़ स्वच्छ, जीवंत दृष्टि| यह कोई दलित ही कर सकता है वह भी स्त्री| जो स्स्वयम सिरजनहार होती है| शिव की वंशज| सारा हलाहल खुद पी दूसरों को जीवन देने वाली...

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TEKCHAND

TEKCHAND टेकचन्द - जन्म: 10 जनवरी 1975. शिक्षा: एम. फिल., पीएच.डी. (हिन्दी) दिल्ली विश्वविद्यालय। प्रकाशन: अज्ञेय: एक समग्र अवलोकन (आलोचना); दौड़ तथा अन्य कहानियाँ (कहानी संग्रह); भाषा साहित्य और सर्जनात्मकता (सह-सम्पादन)। सम्पादन: ‘अपेक्षा’ और ‘युद्धरत आम आदमी’ त्रौमासिक पत्रिका के सम्पादन में सहयोग। सम्मान: हरियाणा दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ. अम्बेडकर विशिष्ट सेवा सम्मान, 2006; राजेन्द्र यादव हंस कथा सम्मान, 2014 (मोर का पंख कहानी के लिए)। सम्प्रति: असिस्टेंट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज, अलीपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय-110007 सम्पर्क: मकान नं.-166, नाहरपुर, सेक्टर-7, रोहिणी, नयी दिल्ली-110085

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