Trikhandita

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-625-5

Author:RANJANA JAISWAL

Pages:136

MRP:Rs.295/-

Stock:Out of Stock

Rs.295/-

Details

स्त्रीवादी रचनाकार रंजना जयसवाल की ‘त्रिखंडिता’ तीन स्त्रियों -अनामा, श्यामा और रमा -की जीवन-राग से भरी कथा है। ये तीनों एक स्तर पर एक ही स्त्री के अलग-अलग रूप हैं तो दूसरे स्तर पर एक- दूजे से स्वायत्त भी। तीनों के जीवन में कई जीवन समाहित हैं, खंडित भी और सम्पूर्ण भी। ये तीनों मिलकर त्रिखंडिता हैं। खंडित ज़िन्दगी के लिए अभिशप्त। सम्पूर्णता की चाह में ही इन्हें मिलता है खंडित जीवन। चाहत और हासिल की कशमकश में थोड़ी जगह अपने लिए, अपनी अस्मिता के लिए, बनाने और बचाने का यत्न बार-बार करती हैं। तीनों के भीतर एक अकुलाहट है, उड़ान की। पर जिस ज़मीं और आसमाँ के वृत्त में इन्हें उड़ान भरनी है वह बेहद मज़बूत, संकीर्ण और कँटीला भी है। नतीजतन इनके पंख बार-बार ज़ख्मी होते हैं, पर हौसला नहीं। ये हार नहीं मानतीं। ज़ख्म भरते ही पुनः पंख फड़फड़ाती हैं, हौसला भरती हैं और ज़ख्म पाती हैं। जिस संरचना से इन्हें यातना मिलती है, उसमें भरी-पूरी दुनिया शामिल है; स्त्री और पुरुष दोनों इसके किरदार हैं।

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