Na Seemayen Na Dooriyan

Original Book/Language: इस पुस्तक को जो बात सबसे अनूठी और विशिष्ट बनाती है वह यह है कि इसमें प्राचीन से लेकर अब तक के अनेक उत्कृष्ट विश्व कवियों की कविताओं के अनुवाद स्वयं आज के श्रेष्ठ हिन्दी कवि द्वारा किये गये हैं। इस संकलन का एक और विशिष्ट पक्ष विभिन्न कवियों पर सारगर्भित बातें और अनुवाद-सम्बन्धी टिप्पणियाँ भी हैं। कुँवर नारायण के लिए ‘अनुवाद का मतलब कविता की भाषाई पोशाक को बदलना भर नहीं रहा है बल्कि उसके उस अन्तरंग तक पहुँचना रहा है जो उसे कविता बनाता है।’ उन्होंने अनुवाद की अवधारणा को अनुरचना की हद तक विस्तृत किया है और अनुवाद-कर्म को अपनी रचनात्मकता की तरह ही महत्त्व दिया है।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-442-8

Author:KUNWAR NARAYAN

Translation:

Pages:285

MRP:Rs.795/-

Stock:In Stock

Rs.795/-

Details

इस पुस्तक को जो बात सबसे अनूठी और विशिष्ट बनाती है वह यह है कि इसमें प्राचीन से लेकर अब तक के अनेक उत्कृष्ट विश्व कवियों की कविताओं के अनुवाद स्वयं आज के श्रेष्ठ हिन्दी कवि द्वारा किये गये हैं। इस संकलन का एक और विशिष्ट पक्ष विभिन्न कवियों पर सारगर्भित बातें और अनुवाद-सम्बन्धी टिप्पणियाँ भी हैं। कुँवर नारायण के लिए ‘अनुवाद का मतलब कविता की भाषाई पोशाक को बदलना भर नहीं रहा है बल्कि उसके उस अन्तरंग तक पहुँचना रहा है जो उसे कविता बनाता है।’ उन्होंने अनुवाद की अवधारणा को अनुरचना की हद तक विस्तृत किया है और अनुवाद-कर्म को अपनी रचनात्मकता की तरह ही महत्त्व दिया है।

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About the writer

KUNWAR NARAYAN

KUNWAR NARAYAN अग्रणी कवि कुँवर नारायण उन विरल बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपनी वैश्विक संवेदनाओं के साथ अपने देश की संस्कृति और इतिहास को पक्की ज़मीन दी है। वे प्रमुखतः कवि हैं, किन्तु साहित्य की सब तरह की विधाओं में भी शुरू से लिखते रहे हैं -- कहानी, समीक्षा, विचार, सिनेमा, निबन्ध, डायरी आदि। उनका पहला कविता संग्रह 1956 में छपा और वे आज तक लगातार लिख रहे हैं। कुँवर नारायण के लेखन का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा वे अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें ‘कुमारन आशान’, ‘साहित्य अकादेमी’, ‘कबीर’, ‘शलाका’, ‘ऑनर ऑफ वार्सा यूनिवर्सिटी’, रोम का ‘प्रीमियो फ़ेरोनिया’, इलाहबाद से ‘डी.लिट्. की मानद उपाधि’, ‘ज्ञानपीठ’, ‘पद्म भूषण’ तथा साहित्य अकादेमी की ‘महत्तर सदस्यता’ हैं।

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