Bhookhand Tap Raha Hai

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-083-3

Author:CHANDRAKANT DEVTALE

Pages:44

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

भूखण्ड तप रहा है

Additional Information

'भूखण्ड तप रहा है' चन्द्रकान्त देवताले की लम्बी कविता का नाट्य रूपान्तरण है और प्रस्तुतकर्ता हैं-स्वतन्त्र कुमार ओझा। प्रकृति के प्रगाढ़ और द्वन्द्वात्मक रिश्तों के बीच मनुष्य ने अपने अस्तित्व को खोजा है। वर्तमान उपलब्धि करोड़ों लोगों के अनवरत अनथक श्रम व बुद्धि पर आधारित है। लेकिन आज यंत्र-संस्कृति ने मनुष्य की आत्मा के स्पन्दनों को रौंद डाला है। नाटक के माध्यम से इस प्रश्न का उत्तर ढूँढ़ने की कोशिश की गयी है कि वे कौन सी चीजें हैं जो आदमी को उसकी जड़ों से काटकर आदमी बनने से रोकती हैं। नाटक अति रोचक, संवेदनशील, प्रभावशाली व वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करने में समर्थ है। नाटक का कथानक सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है।

About the writer

CHANDRAKANT DEVTALE

CHANDRAKANT DEVTALE जौलखेड़ा (जिला बैतूल), मध्य प्रदेश में 7 नवम्बर 1936 को जन्म। प्रारंभिक शिक्षा बड़वाह तथा इंदौर में। होल्कर कॉलेज, इंदौर से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। सागर विश्वविद्यालय से मुक्तिबोध पर 1984 में पीएच.डी.। 1961 से 1996 तक उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के तहत पन्ना, भोपाल, उज्जैन, पिपरिया, राजगढ़, रतलाम, नागदा तथा इन्दौर के कॉलेजों में अध्यापन। शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर में हिन्दी विभागाध्यक्ष तथा डीन, कला संकाय, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय, इन्दौर के पदों से सेवा निवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन तथा पत्रकारिता। दैनिक भास्कर, इंदौर में छह वर्षों तक नियमित स्तंभ लेखन।

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