Bertolt Brecht Ki Kahani : Socrates Ka Ghao

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-082-6

Author:CHANDRAKANT DEVTALE

Pages:44

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

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Details

बर्ल्टोल्ट ब्रेख्त की कहानी पर आधारित चन्द्रकान्त देवताले द्वारा नाट्य रूपान्तरण ‘सुकरात का घाव’ बहुत ही प्रभावशाली है। रंगमंच पर सफलतापूर्वक मंचस्थ नाटक ‘सुकरात का घाव’ का कला पक्ष भी उतना ही सबल है जितना साहित्य पक्ष। इसका उज्जैन के समर्पित रंगकर्मी धीरेन्द्र परमार के निर्देशन में कई जगह सफल प्रदर्शन हुआ है। ‘दरअसल जान बचाते हुए ज़िन्दा नहीं रहा जा सकता। मैंने कुछ नहीं किया...सिर्फ़ ज़िन्दा रहने और ज़िन्दा रखने की कोशिश के सिवा।’ ‘सत्य के खि़लाफ़ झूठ गुस्ताख़ी करता है, ज़िन्दगी के खि़लाफ़ मौत, शान्ति के खि़लाफ़ युद्ध गुस्ताख़ी है, मेरे खि़लाफ़ मौन’- जैसे संवाद नाटक को और रोचक एवं प्रभावकारी बना देते हैं। नाटक का कथानक सार्वकालिक है, संवाद प्रभावशाली हैं। यही नाटक की सफलता का रहस्य है।

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About the writer

CHANDRAKANT DEVTALE

CHANDRAKANT DEVTALE जौलखेड़ा (जिला बैतूल), मध्य प्रदेश में 7 नवम्बर 1936 को जन्म। प्रारंभिक शिक्षा बड़वाह तथा इंदौर में। होल्कर कॉलेज, इंदौर से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। सागर विश्वविद्यालय से मुक्तिबोध पर 1984 में पीएच.डी.। 1961 से 1996 तक उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के तहत पन्ना, भोपाल, उज्जैन, पिपरिया, राजगढ़, रतलाम, नागदा तथा इन्दौर के कॉलेजों में अध्यापन। शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर में हिन्दी विभागाध्यक्ष तथा डीन, कला संकाय, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय, इन्दौर के पदों से सेवा निवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन तथा पत्रकारिता। दैनिक भास्कर, इंदौर में छह वर्षों तक नियमित स्तंभ लेखन।

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