Gair-Dalit

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-86799-10-4

Author:Dr. Sharan Kumar Limbale, Dr. Jibhao Sa. More

Pages:212

MRP:Rs.450/-

Stock:In Stock

Rs.450/-

Details

गैर-दलित

Additional Information

डॉ. शरणकुमार लिंबाले द्वारा लिखित 'गैर-दलित' समीक्षा ग्रन्थ केवल मराठी साहित्य में ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य में महत्त्वपूर्ण वृद्धि करने वाला है। गैर-दलित और विशेषतया ब्राह्मणी लेखकों के चेतन और अवचेतन में ब्राह्मण्य कैसे व्याप्त है, इसका दिग्दर्शन करने वाला यह समीक्षा ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को पढ़ने के बाद भारत में हो रही सामाजिक क्रान्ति की अपूर्णता ध्यान में आती है और यह एहसास भी तीव्र होता है कि बदली हुई भौतिक परिस्थितियों में मात्र अस्मिता और संस्कृति की राजनीति न कर भौतिक परिवर्तन की राजनीति तथा समाजनीति की शुरुआत किये बगैर समताधिष्ठित समाज का निर्माण नहीं होगा।

About the writer

Dr. Sharan Kumar Limbale, Dr. Jibhao Sa. More

Dr. Sharan Kumar Limbale, Dr. Jibhao Sa. More 1 जून, 1956 को जन्मे डॉ. शरणकुमार लिंबाले ने एम.ए. , पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। ‘अक्करमाशी’ (आत्मकथा) , ‘‘छुआछूत’, ‘‘देवता आदमी’, ‘‘दलित ब्राह्मण’ (कहानी संग्रह) , ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ (समीक्षा) , ‘नरवानर’, ‘हिंदू’, ‘बहुजन’ (उपन्यास) आपकी हिन्दी में प्रकाशित कृतियाँ हैं। आप नासिक (महाराष्ट्र) के यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी कल्याण विभाग के प्रोफेसर और डायरेक्टर हैं। अनुवादक डॉ. जिभाऊ शा. मोरे का जन्म 1 जून 1970 को हुआ है। सम्प्रति यह स्नातकोत्तर के.जे. सोमैया कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कोपरगाँव जिला-अ. नगर (महाराष्ट्र) में एसोसिएट प्रोफेसर तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष हैं।

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