Ujla Ujla Poora Chand

Format:Paper Back

ISBN:978-93-87330-88-7

Author:NIDA FAZLI

Pages:142

MRP:Rs.195/-

Stock:In Stock

Rs.195/-

Details

निदा फ़ाज़ली सही मायनों में अवाम के शायर हैं। उनकी शायरी में जो फ़कीराना ठाठ है, वो ठाठ उनके अन्दर के लोककवि की संवेदना को भी महसूस कराता है। यह शे’र वही शायर कह सकता है, लोककवि जिसकी रचनाशीलता में हो- दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला! निदा फ़ाजली की शायरी में भारतीय जनमानस के सुख-दुख बसते हैं। निदा फ़ाज़ली की शायरी से गुज़रना लोकजीवन, दीन-दुनिया, स्मृतियों और नये-पुराने समय से गुफ़्तगू करने जैसा है। निदा ऐसे बड़े शायर हैं जो अपनी शायरी में ज़िन्दगी के वैभव को रचते हैं। यह किताब निदा फ़ाज़ली की शायरी का महकता हुआ, ताज़ादम और सर्वश्रेष्ठ गुलदस्ता है।

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About the writer

NIDA FAZLI

NIDA FAZLI निदा फ़ाजली : निदा फ़ाजली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में और प्रारंभिक जीवन ग्वालियर में गुजरा। ग्वालियर में रहते हुए उन्होंने उर्दू अदब में अपनी पहचान बना ली थी और बहुत जल्द वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के एक महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में पहचाने जाने लगे। निदा फ़ाजली की कविताओं का पहला संकलन ‘लफ़्ज़ों का पुल’ छपते ही उन्हें भारत और पाकिस्तान में जो ख्याति मिली वह बिरले ही कवियों को नसीब होती है। इससे पहले अपनी गद्य की किताब मुलाकातें के लिए वे काफी विवादास्पद और चर्चित रह चुके थे। ‘खोया हुआ सा कुछ’ उनकी शाइरी का एक और महत्त्वपूर्ण संग्रह है। सन 1999 का साहित्य अकादमी पुरस्कार ‘खोया हुआ सा कुछ’ पुस्तक पर दिया गया है। उनकी आत्मकथा का पहला खंड ‘दीवारों के बीच’ और दूसरा खंड ‘दीवारों के बाहर’ बेहद लोकप्रिय हुए हैं। फिलहाल: फिल्म उद्योग से सम्बद्ध।

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