RAAT MEIN HARMONIUM

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-625-2

Author:UDAY PRAKASH

Pages:144

MRP:Rs.250/-

Stock:Out of Stock

Rs.250/-

Details

रात में हारमोनियम

Additional Information

‘रात में हारमोनियम उदय प्रकाश का तीसरा काव्य-संग्रह है, जो एक लम्बे अन्तराल के बाद प्रकाशित हो रहा है। यह देखकर सुखद आश्चर्य होता है कि पिछले कुछ वर्षों में एक कथाकार के रूप में अपनी अद्वितीय पहचान बनानेवाला यह रचनाकार अपनी कथाकृतियों के समानांतर कविता की अपनी ज़मीन पर, एक नयी ऊर्जा के साथ निरंतर सक्रिय रहा है। ‘रात में हारमोनियम’ की कविताएँ उसी सक्रियता से उपजी एक जीवन्त रागमाला की तरह हैं-अपने आरोह-अवरोह की सारी गमक और स्वरों के बीच की गहरी खामोशियों के साथ। मुझे हमेशा लगता रहा है कि उदय प्रकाश की कहानियों के जादुई संसार में प्रवेश करने की सबसे विश्वसनीय कुंजी उनकी कविताओं के पास है। इस संग्रह की अधिकांश कविताएँ, मेरी इस धारणा को न सिर्फ़ नयी खुराक़ देती हैं, बल्कि किसी गहरे धरातल पर उसे और अधिक पुष्ट भी करती हैं। उदय प्रकाश के भीतर का कवि हर बार कविता को वहाँ से पकड़ने की कोशिश करता है, जहाँ उसका मूल उत्स है। इसलिए वह अपने अनुभव-लोक में हमेशा इस तरह प्रवेश करता है-“विकसित सभ्यताएँ जिस तरह लौट जाती हैं धरती के गर्भ में” या “इतिहास जिस तरह विलीन हो जाता है समूह की मिथकगाथा में”, हमारी चेतना पर निरन्तर जमती जाती समय की धूल को हटाकर उसके अन्दर झाँकने का यह उनका अपना ढंग है, जहाँ यथार्थ और स्वप्न के बीच के सारे कामचलाऊ विभाजन व्यर्थ हो जाते हैं। यह कवि उदय प्रकाश की एक ऐसी काव्य युक्ति है, जिसे उन्होंने अपने लम्बे आत्मसंघर्ष के भीतर से अर्जित किया है। ‘मैं लौट जाऊँगा’, ‘ढेला’, ‘चन्द्रमा' या ‘बचाओ' जैसी कविताओं में उनके इस काव्यकौशल के उत्कृष्ट उदाहरण देखे जा सकते हैं। -केदारनाथ सिंह

About the writer

UDAY PRAKASH

UDAY PRAKASH उदय प्रकाश 1952, मध्य प्रदेश के शहडोल (अब अनूपपुर) ज़िले के गाँव सीतापुर में जन्म। सागर वि.वि. सागर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और इसके मणिपुर केन्द्र में लगभग चार वर्ष तक अध्यापन। संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश, भोपाल में लगभग दो वर्ष विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी। इसी दौरान ‘पूर्वग्रह’ का सहायक सम्पादन। नौ वर्षों तक टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के समाचार पाक्षिक ‘दिनमान’ के सम्पादकीय विभाग में नौकरी। बीच में एक वर्ष टाइम्स रिसर्च फ़ाउंडेशन के स्कूल ऑफ़ सोशल जर्नलिज्म में अध्यापन। लगभग दो वर्ष पी.टी.आई. (टेलीविज़न) और एक वर्ष इंडिपेंडेंट टेलीविज़न में विचार और पटकथा प्रमुख। कुछ समय ‘संडे मेल’ में वरिष्ठ सहायक सम्पादक रहे। इन दिनों स्वतन्त्र लेखन तथा फ़िल्म और मीडिया के लिए लेखन। ‘सुनो कारीगर’, ‘अबूतर-कबूतर’, ‘रात में हारमोनियम, ‘एक भाषा हुआ करती है’, ‘नयी सदी के लिए चयन: पचास कविताएँ’ (कविता संग्रह); ‘दरियाई घोड़ा’, ‘तिरिछ’, ‘और अन्त में प्रार्थना’, ‘पॉल गोमरा का स्कूटर’, ‘पीली छतरी वाली लड़की’, ‘दत्तात्रोय के दुख’, ‘मोहन दास’, ‘अरेबा परेबा’, ‘मैंगोसिल’ (कहानी संग्रह); ‘ईश्वर की आँख’, ‘अपनी उनकी बात’ और ‘नयी सदी का पंचतन्त्र’ (निबन्ध, आलोचना) पुस्तकें प्रकाशित। इसके अलावा लगभग 8 पुस्तकें अंग्रेज़ी में प्रकाशित। ‘पीली छतरी वाली लड़की’ (उर्दू), ‘तिरिछ अणि इतर कथा’, ‘अरेबा परेबा’ (मराठी), ‘मोहन दास’ कन्नड़ में प्रकाशित, पंजाबी, उड़िया, अंग्रेज़ी में प्रकाश्य। ‘लाल घास पर नीले घोड़े’ (मिखाइल शात्रोव के नाटक का अनुवाद और रूपान्तर), ‘कला अनुभव’ (प्रो. हरियन्ना की सौन्दर्यशास्त्रीय पुस्तक का अनुवाद), ‘इन्दिरा गाँधी की आखिरी लड़ाई’ (बी.बी.सी. संवाददाता मार्क टली-सतीश जैकब की किताब का हिन्दी अनुवाद), ‘रोम्यां रोलां का भारत’ (आंशिक अनुवाद और सम्पादन) का अनुवाद। भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान, श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार, मुक्तिबोध पुरस्कार, साहित्यकार सम्मान, हिन्दी अकादेमी, दिल्ली, रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना सम्मान, पहल सम्मान, कथाक्रम सम्मान, पुश्किन सम्मान, द्विजदेव सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कारों से पुरस्कृत।

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