Maha Mai

Format:Paper Back

ISBN:978-93-86799-53-1

Author:Chandrashekhat Kambar Translated by Sindhu Mishra, Bhanu Bharti

Pages:60

MRP:Rs.100/-

Stock:In Stock

Rs.100/-

Details

महा माई

Additional Information

मानवीय जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी है उसकी नश्वरता। व्यक्ति-स्वातन्त्र्य के समक्ष मृत्यु हमेशा एक चुनौती की तरह उपस्थित रही है। आसन्न मृत्यु के बावजूद मानवीय जीवन की गरिमा और सार्थकता के लिए मनुष्य का संघर्ष साहित्य और कलाओं के मूल में सतत बना रहा है। ‘महा माई' इसी संघर्ष का सघन नाटक है, जो एक साथ कई स्तरों पर घटित होता हुआ मृत्यु पर मानवीय प्रेम की विजय का उद्घोष करता है। मृत्यु की देवी महा माई के दत्तक पुत्र संजीव की एक चिकित्सक के रूप में बड़ी ख्याति है, लेकिन किसी का भी इलाज करने से पहले उसे अपनी माँ की स्वीकृति चाहिए होती है। एक चिकित्सक के नाते युवा संजीव के लिए माँ का यह हस्तक्षेप एक बाधा है, जिसके कारण वह विचलित है। ऐसे में जब वह युवा राजकुमारी के प्रेम में पड़कर, माँ की आशा के विरुद्ध, उसका इलाज करता है तो मृत्यु और मानवीय स्वातन्त्र्य के बीच जो संघर्ष छिड़ता है वही महा माई नाटक का कथ्य है। ऊपर से लोक कथानक जैसी सरलता लिए महा माई नाटक मानवीय विडम्बना का एक बड़ा विमर्श हमारे लिए प्रस्तुत करता है।

About the writer

Chandrashekhat Kambar Translated by Sindhu Mishra, Bhanu Bharti

Chandrashekhat Kambar Translated by Sindhu Mishra, Bhanu Bharti चन्द्रशेखर कंबार देश के अग्रणी नाटककारों में से एक चन्द्रशेखर कंबार का जन्म 1938 में हुआ। वह कन्नड़ के ख्यातिप्राप्त कवि और नाटककार हैं। चन्द्रशेखर कंबार को 1983 में संगीत नाटक अकादमी, ‘जोकुमारस्वामी' नाटक को सर्वश्रेष्ठ नाटक का वर्ष 1975 का नाट्य संघ अवार्ड, 'श्री सम्पिज़' को 1991 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है। इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं : चकोरी, सिंगारव्वा, मटू अरामने (उपन्यास), मुझे सुनो (हेलाटेना केला), सिल्वर फिश (बेल्ली मीनू) (कविता) इत्यादि। सांस्कृतिक और शैक्षणिक समितियों के सदस्य के अलावा चन्द्रशेखर कंबार कन्नड़ विश्वविद्यालय के कुलपति और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के चेयरमैन भी रहे हैं। वर्तमान में आप साहित्य अकादेमी के उपाध्यक्ष हैं। /अनुवादक भानु भारती जन्म : 16 जुलाई 1947, अजमेर, राजस्थान। 'राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय' नयी दिल्ली से 1973 में स्नातक। नाट्य-निर्देशक एवं नाटककार के रूप में बहुप्रतिष्ठित । अब तक 70 से अधिक नाटकों का निर्देशन, जिनमें से अधिकांश प्रस्तुतियाँ आधुनिक-भारतीय रंगमंच में विशिष्ट उपलब्धि के रूप में पहचानी-सराही जाती हैं। भानु भारती जी 'राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी', नयी दिल्ली; 'राजस्थान संगीत नाटक अकादमी', जोधपुर; 'राजस्थान साहित्य अकादमी', उदयुपर एवं नान्दीकार कोलकाता से पुरस्कृत हैं।

Books by Chandrashekhat Kambar Translated by Sindhu Mishra, Bhanu Bharti

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality