Rangmanch : Naya Paridrashya

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-87889-32-3

Author:RITARANI PALIWAL

Pages:280

MRP:Rs.595/-

Stock:In Stock

Rs.595/-

Details

रीतारानी पालीवाल की यह पुस्तक रंगमंच की अवधारणा का समग्र बिम्ब प्रस्तुत करने का प्रयास है। जहाँ नाटक और रंगमंच की पारस्परिकता को विभिन्न कोणों और पहलुओं से देखते हुए नवीन परिप्रेक्ष्य में परिभाषित किया गया है। इसमें नाट्यधर्मी और लोकधर्मी परम्पराओं के सांस्कृतिक मिथकों, आख्यानों, प्रतीकों, बिम्बों से साक्षात्कार करते हुए प्राच्य और पाश्चात्य रंग-दृष्टियों की स्वतन्त्र निजी पहचान को उद्घाटित किया गया है। भारतीय, एशियाई और पश्चिमी रंग-परम्पराओं के स्वरूप और विशिष्टताओं को सामने लाने के साथ ही यह उनके बीच आदान-प्रदान की उपलब्धियों और सीमाओं को भी रेखांकित करती है।

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About the writer

RITARANI PALIWAL

RITARANI PALIWAL जन्म: 3 सितम्बर 1949, खैरगढ़, ज़िला - मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा: हिन्दी और अंग्रेजी में एम.ए. करने के बाद नाटक और रंगमंच पर हिन्दी में पीएच.डी. और डी.लिट्. किया। जापान में रहते हुए जापानी नाटक और रंगमंच को देखने-जानने-समझने का अवसर मिला। साहित्य, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर पत्रिकाओं में लेखन। प्रमुख प्रकाशन: यूनानी और रोमी काव्यशास्त्र, रंगमंच और जयशंकर प्रसाद के नाटक, जयशंकर प्रसाद और मोहन राकेश की रंग-दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन, जापानी रंग-परम्परा: नोह, काबुकी और बुनाराकु, जापान के विविध रंग-राग, अज्ञेय के सृजन में जापान, अनुवाद की सामाजिक भूमिका, अनुवाद प्रक्रिया और परिदृश्य। प्रेमचन्द के उपन्यास कर्मभूमि का अंग्रेजी में अनुवाद, जापानी मन्योशु कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्रोफ़ेसर तथा मानविकी विद्यापीठ की निदेशक रहीं। सम्प्रति: सस्ता साहित्य मंडल की सदस्य सचिव।

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