Team Loktantra : Bhartiya Cricket Ki Shandar Kahani

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8788-991-0

Author:Rajdeep Sardesai

Pages:300

MRP:Rs.599/-

Stock:In Stock

Rs.599/-

Details

क्रिकेट वो शय है जो इस देश को सबसे बेहतर ढंग से एक कर सकती है। भारतीय क्रिकेट टीम छोटे-बड़े शहरों से आये हुए लोगों का एक शानदार मिश्रण है जहाँ कितने ही अलग-अलग धर्म, वर्ग, जाति, इलाकों और भाषाओं के खिलाड़ी साथ खेलते हैं। ये वो समूह है जिसमें राँची के एक पम्प मैनेजर का बेटा बड़े ख़्वाब देखने का साहस कर सकता है, जहाँ टैलेण्ट लेकर पैदा होने वाला मुम्बई का एक लड़का हैदराबाद की तंग गलियों से आने वाले एक मुसलमान के साथ खेल सकता है। उस वक़्त जब परिवारवाद ने बॉलीवुड और राजनीति को जकड़ के रखा है, क्रिकेट ही वो फील्ड है जहाँ सब कुछ समतल ज़मीन पर खेला जा रहा है और जो हमारे संविधान के उसूलों को सही मायनों में साकार कर रहा है। ये खेल असल में भारत की सबसे सटीक छवि सामने लाता है। अपनी इस किताब में बेस्टसेलिंग लेखक और पत्रकार राजदीप सरदेसाई 11 भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के माध्यम से स्वाधीनता के बाद के भारतीय क्रिकेट की कहानी हम सभी के सामने लेकर आये हैं। इन खिलाड़ियों में 60 के दशक से दिलीप सरदेसाई से लेकर महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली तक शामिल हैं। ये किताब 11 सबसे अच्छे भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में नहीं है। ये किताब व्यक्तिगत हवालों से आये हुए किस्सों और कहानियों के दम पर भारतीय क्रिकेट की यात्रा के बारे में बात करती है। ये किताब उन दिनों से शुरुआत करती है जब क्रिकेटर्स ट्रेन में सफ़र करते थे, एक टेस्ट मैच के कुछ सौ रुपये मिलते थे और फिर वहाँ आकर रुकती है जब क्रिकेट में करोड़ों रुपयों का व्यापार करने वाला आईपीएल आ चुका है। इस तरह से क्रिकेट और साथ ही भारतीय समाज के विकास का लेखा-जोखा तैयार किया गया है।

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About the writer

Rajdeep Sardesai

Rajdeep Sardesai भारतीय टीवी के सबसे मशहूर और जाने-माने चेहरों में स एक, टीवी टुडे ग्रुप में कंसल्टिंग एडिटर हैं और 2014: द इलेक्शन दैट चेंज्ड इण्डिया नाम की बेस्टसेलिंग किताब के लेखक भी हैं। प्रशंसा एक सम्पूर्ण पत्रकार। डीटेल्स पर इनकी ख़ास नज़र रहती है। -इण्डिया टुडे एकदम खरा और स्पष्ट... साथ ही बेहद अपनेपन के साथ लिखी गयी। -हिन्दुस्तान टाइम्स निर्भीक और निष्पक्ष। -द इकोनॉमिस्ट स्पष्ट... सभी को लुभाते हुए चलते हैं लेकिन किसी के भी प्रति कोई समर्पण भाव नहीं। -द हिन्दू

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