Apne Apne Ram

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-875-1

Author:BHAGWAN SINGH

Pages:376

MRP:Rs.695/-

Stock:In Stock

Rs.695/-

Details

अपने अपने राम वस्तुतः एक विशाल षड्यंत्र कथा है जिसका ताना-बाना लेखक ने बड़ी बारीकी से बुना है। इसलिए अति-परिचित कथा में भी आदि से अन्त तक कुतूहल बना रहता है और बहुत कुछ ‘डिटेक्टिव' का-सा मजा आता है। वसिष्ठ के जासूस हर जगह हैं। डॉ. नामवर सिंह उपन्यास की रोचकता, कथा-कौशल, संवादों की अर्थ गर्भी और वैचारिक तैयारी इसे एक बेहद पठनीय रचना बना देते हैं। श्रद्धा की खाइयों में लगभग व्यावसायिक, राजनैतिक, तिरस्कृत और अपठनीय बना कर डाल दी गई राम-कथा के इस ‘उद्धार' के लिए भगवान सिंह को बधाई दी जानी चाहिए और दसियों बरसों बाद किसी रचनात्मक किताब के बहाने अपनी बात कहने के लिए नामवर जी को धन्यवाद। -राजेन्द्र यादव, सम्पादक 'हंस'

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About the writer

BHAGWAN SINGH

BHAGWAN SINGH जन्म : 1931 में गोरखपुर जनपद के गगहा गाँव में। साहित्य की विविध विधाओं में लेखन। उनका शोधपरक लेखन इतिहास और भाषा के क्षेत्र में रहा है। प्रकाशित कृतियाँ : काले उजले टीले (1964); महाभिषग (1973); अपने अपने राम (1992); परम गति (1999); उन्माद (2000); शुभ्रा (2000); अपने समानान्तर (1970); इन्द्र धनुष के रंग (1996)। शोधपरक रचनाएँ : स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन (अंशत: प्रकाशित, नागरी प्रचारिणी पत्रिका, 1973); आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता (1973); हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, दो खंडों में (1987); दि वेदिक हड़प्पन्स (1995); भारत तब से अब तक (1996); भारतीय सभ्यता की निर्मिति (2004); भारतीय परंपरा की खोज (2011); प्राचीन भारत के इतिहासकार (2011); कोसंबी : मिथक और यथार्थ (2011)। सम्प्रति : 'ऋग्वेद की परम्परा’ पर धारावाहिक लेखन, 'नया ज्ञानोदय’ में।

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