Aadim Raag

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-659-7

Author:RAMDARSH MISHRA

Pages:120

MRP:Rs.55/-

Stock:In Stock

Rs.55/-

Details

आदिम राग

Additional Information

हम जब धरती से ऊपर उठ आते हैं तब ऊपर से धरती की सतह ही गहरी खाई और नीचाई के रूप में दीखने लगती है। यह जो नीचे दिखाई पड़ रहा है वह धरती के नीचे नहीं है, या तो धरती पर है या धरती के ऊपर है" अभी हम जहाँ है वह ऊपर जाने के बाद खाई-सा दीखने लगेगा। तब यह ऊँचाई-नीचाई सापेक्षिक है । और यह ऊँचाई, यह चढ़ाई तो सामान्य नहीं है, यह तो साँस खींचकर खून को ऊपर चढ़ाने जैसा है। सामान्य तो धरती की सतह का जीवन ही है, जहाँ दो घण्टे बाद फिर लौटना है। यह चढ़ाई कितना थका डालती है? ऊपर चढ़ने का अहकार तो जरूर तृप्त होता है, लेकिन अंग-अंग एक असामान्य तनाव में अपने को थका डालता है। और धरती की सतह पर जीवन भर चलते रहो, अंग-अंग अपनी सहज प्रसन्नता से खिला रहता है। रक्त बिना किसी तनाव और दबाव के उनमें तैरता रहता है। (उपन्यास से)

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