KAVITA KA GAON

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-788-4

Author:SHEO NARAYAN SINGH ANIVED

Pages:184

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

कविता का गाँव

Additional Information

कविता में जीवन का संधान प्रो. केदारनाथ सिंह अनिवेद की इधर की कविताओं में एक अलग किस्म का उत्तर-आधुनिक भाव-बोध उभरता दिखायी पड़ता है, जिसमें गाँव के बरक्स शहरी जीवन की ऊपरी चमक-दमक और छद्म की आलोचनात्मक पड़ताल है तथा कहीं-कहीं उस पर करारा व्यंग्य भी - जैसे 'सर'(Sir) की संस्कृतिवाली कविता में कुछ अन्य कविताओं में भी व्यंग्य की यह महीन धार देखी जा सकती है। “मौन अस्तित्त्व" जैसी कविता में एक और नयी बात देखी जा सकती है, और उसे किसी अन्य शब्द के अभाव में एक खास तरह का अस्तित्त्वबोध कहा जा सकता है। पर यह अनिवेद की कविताओं का मूल स्वभाव नहीं है। वे हैं वही भीतर से कला-सजग और बाहर से विमर्श-धर्मा रचनाकार। यह विमर्शमखी स्वर हाल की कविताओं में ज़्यादा प्रखर हुआ है, जो कविता की बनावट में एक बौद्धिक तल्खी पैदा करता है। अपनी समग्रता में यह संग्रह गांव से शहर तक का समग्र विस्तार अपने पन्नों में समेटे हुए है और यही बात इसे उल्लेखनीय बनाती है तथा अन्यों से पृथक भी। अनिवेद, की कुछ कविताएँ पहले भी देखी थीं, पर समवेत रूप में इतनी कविताओं को पढ़ने का अवसर पहली बार मिला। इन्हें पढ़कर जो पहली प्रतिक्रिया हुई वह यह कि ये एक ऐसे व्यक्तित्व से निकली हुई हैं जिसका अनुभव-संसार गाँव से शहर तक फैला हुआ है। यह उल्लेखनीय है कि शिव नारायण सिंह अनिवेद के व्यक्तित्व के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं। वे एक सफल प्रशासनिक अधिकारी हैं, एक चर्चित कलाकार हैं और इन दोनों के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी हैं। यूरोप में ऐसे कलाकरों की एक श्रेणी मिलती है, जिन्होंने चित्र-रचना के साथ-साथ काव्य-लेखन के क्षेत्र में भी अच्छी-खासी ख्यति अर्जित की है। अपने यहां भी ऐसे कुछ कवियों, के नाम लिये जा सकते हैं। अनिवेद की ये कविताएँ उसी परम्परा को आगे बढ़ने वाली कविताएं हैं। इन कविताओं से, गुजरते हए ऐसा लगता है कि कवि अपने चित्रों के समानांतर एक और दनिया रचने के संर्घा में जुटा है, जिसकी नींव रंगों में नहीं, भाषा के भीतर है। अभिव्यक्ति के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में संचरण का यह रचनात्मक संघर्ष, पाठक के मन पर एक विशेष प्रकार का भाव छोड़ता है और यही प्रभाव इन शब्द-सृष्टियों की प्रामाणिकता को पुष्ट करता है।

About the writer

SHEO NARAYAN SINGH ANIVED

SHEO NARAYAN SINGH ANIVED शिव नारायण सिंह अनिवेद जन्म : 18 अक्टूबर, 1961 उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के ओघनी ग्राम में जन्मे वरिष्ठ प्रशासक श्री शिव नारायण सिंह अनिवेद ने कला-संस्कृति की दुनिया में अपनी पहचान चित्रकार-कवि के साथ ही, एक गंभीर समाज-संस्कृति समीक्षक तथा रैडिकल चिंतक के रूप में कायम की है। वे अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा के लिए जितने सराहे गये हैं, उतने ही सामाजिक-वैचारिक प्रश्नों पर सार्थक हस्तक्षेप के लिए भी। चित्रकला के लिए उन्हें ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। कॉस्मिक सेलिब्रेशन, डीकंस्ट्रक्टिंग द हेजेमनी ऑफ द स्टेट: डायलेक्टिक्स ऑफ डॉमिनेशन ऐन्ड रेजिस्टेंस तथा आधुनिक भारत की द्वंद्व-कथा उनकी तीन पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। इसी के साथ हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-सांस्कृतिक-वैचारिक विषयों पर उनके अनेक लेख भी प्रकाशित हो चुके है। साथ ही वे देश-विदेश में अनेक एकल तथा सामूहिक चित्रकला प्रदर्शनियों, काव्यपाठों तथा सेमिनारों में भाग ले चुके हैं। श्री अनिवेद, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, संस्कृति विभाग, भारत सरकार में उपसचिव भी रह चुके हैं।

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