Cinema Aur Sahitya Nazi Yatna Shiviron Ki Trasad Gatha

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8868-421-7

Author:VIJAY SHARMA

Pages:265

MRP:Rs.695/-

Stock:In Stock

Rs.695/-

Details

सिनेमा और साहित्य नाजी यातना शिवरों की त्रासद गाथा

Additional Information

मनुष्य एक स्वतन्त्रचेता प्राणी है। अनुशासन के नाम पर उसकी स्वतन्त्रता का हनन उसे गुलाम बनाता है। तानाशाह के लिए गुलामी बहुत मुफ़ीद होती है। ऐसे लोग, ऐसे संगठन कभी नहीं चाहते हैं कि लोग प्रश्न पूछे। प्रश्न, ऐसे लोगों को असुविधा में डालते हैं। प्रश्न, उनके छद्म को उघाड़ते हैं। प्रश्न सिद्ध करते हैं कि दूसरे भी सोच रहे हैं, सोच सकते हैं। इससे तानाशाहों का वर्चस्व टूटता है। इसीलिए तानाशाह अपने लोगों और अधिकांश शिक्षक और माता-पिता अपने छात्रों और बच्चों से कहते हैं तुम मत सोचो, हम हैं न तुम्हारे लिए सोचने वाले। और कहते हैं, हम सदैव तुम्हारा भला सोचते हैं। बचपन से गुलामी के बीज पड़ जाते हैं। माता-पिता के पास बच्चों के प्रश्न सुनने का समय नहीं होता है, उत्तर तो दूर की बात है। अकसर उत्तर कैसे दें, वे नहीं जानते हैं। कई बार उन्हें सही उत्तर मालूम नहीं होते हैं। गलत उत्तर और अधिक नुक़सान पहुँचाता है। प्रश्न सुनने का धैर्य उनके पास नहीं होता है। इसलिए वे कहते हैं, “यह बहुत प्रश्न पूछता है/पूछती है। या फिर कहते हैं, ‘दिमाग मत चाटो।' ‘जाओ जा कर खेलो।' ‘मेरे पास समय नहीं है, तुम्हारी फालतू बातों का उत्तर देने के लिए।' ‘मुझे और बहुत ज़रूरी काम करने हैं।' मनोविज्ञान कहता है जिस दिन मन में प्रश्न उठने बन्द हो जाते हैं, व्यक्ति की प्रगति उसी दिन रुक जाती है, असल में, उसी दिन उस मनुष्य की मृत्यु हो जाती है। जानने के लिए सवाल पूछना और असहमति में सवाल उठाना दोनों आवश्यक है। अन्धकार युग में किताबें जलायी जाती हैं। क्योंकि किताबें प्रश्न पूछने को उकसाती हैं, जागरूक करती हैं और प्रश्न पूछने को प्रेरित करती हैं। ये प्रश्न कुछ लोगों के लिए असुविधा उत्पन्न करते हैं।

About the writer

VIJAY SHARMA

VIJAY SHARMA जन्म : 2 नवम्बर 1952, सहजनवाँ, जिला गोरखपुर। शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी), एम. एड. । प्रवासी हिन्दी कथा साहित्य पर शोध जारी। प्रकाशित कृतियाँ : अपनी धरती, अपना आकाश : नोबेल के मंच से, लौह शिकारी, वॉल्ट डिज्नी : विजय शर्मा ऐनीमेशन का बादशाह। चार पाण्डुलिपियाँ (फिल्म, प्रवासी कथा साहित्य, मैडम बोवरी एवं नोबेल साहित्य पुरस्कृत महिलाएँ) विभिन्न प्रकाशकों के पास। हिन्दी की राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय साहित्यिक मुद्रित तथा ई-पत्रिकाओं में लेख, पुस्तक समीक्षा, फिल्म समीक्षा, कहानी समीक्षा, अनुवाद प्रकाशित। प्रसारण : आकाशवाणी की पुस्तक समीक्षक, कहानी तथा वार्ता प्रसारित। ‘सहयोग' बहुभाषीय साहित्यिक संस्था की पूर्व अध्यक्ष। सम्मान : इस्पात मेल विजया साहित्य सम्मान, 2002 । सम्प्रति : रीडर, लॉयोला कॉलेज ऑफ एजूकेशन, जमशेदपुर, इग्नू असिस्टेंट सेंटर इंचार्ज, काउंसलर इग्नू बी. एड., | एम.एड., राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में शोध-पत्र पठन, वर्कशॉप-सेमिनार संचालन।

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