Hindi Sahitya Mein Kinnar Jeevan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-88434-91-1

Author:Dr. Dilip Mehra

Pages:198

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

भारतीय समाज और जीवन में तीसरा लिंग सामान्यतः उपेक्षित रहा है इसलिए साहित्य में भी यह एक उपेक्षित विषय रहा है दलित-आदिवासी-स्त्री विमर्श की परम्परा में अब किन्नर विमर्श जुड़ चुका है। हिन्दी में किन्नर विषय को लेकर पहला उपन्यास नीरजा माधव का ‘यमदीप' (2002) आया था, तब से लेकर अब तक किन्नर विषय पर केन्द्रित दर्जन भर उपन्यास और कई कहानी-संग्रह आ चुके हैं। अदेखे यथार्थ और नये विषय के कारण किन्नर साहित्य पाठकों के लिए विशेष आकर्षण का विषय बन रहा है। प्रो. दिलीप मेहरा सम्पादित ‘हिन्दी साहित्य में किन्नर जीवन' पुस्तक इसी विषय पर केन्द्रित है जिसमें किन्नर जीवन से सम्बद्ध उपन्यासों और कहानियों पर श्रमपूर्वक लिखे आलेख हैं। हमारे स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग में सम्पन्न संगोष्ठी की फलश्रुति है-प्रस्तुत पुस्तक। संगोष्ठी में पढ़े गये शोध पत्रों में से केवल चुने हुए कुछ आलेख इसमें शामिल हैं। सम्पादन के लिए मैं प्रो. दिलीप भाई मेहरा को धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि पाठकों के ज्ञानवर्द्धन में यह पुस्तक मददगार होगी। डॉ. दयाशंकर त्रिपाठी प्रो. एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग सरदार पटेल विश्वविद्यालय वल्लभ विद्यानगर

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About the writer

Dr. Dilip Mehra

Dr. Dilip Mehra जन्म : 27 दिसम्बर 1968, बार, ता. वीरपुर, जनपद-खेड़ा, गुजरात। शिक्षा : एम.ए. (स्वर्ण पदक), एम. फिल., पीएच.डी.। सम्प्रति : आचार्य, हिन्दी विभाग, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर। प्रधान सम्पादक : साहित्य वीथिका, अर्द्धवार्षिक (अन्तर्राष्ट्रीय)। प्रोजेक्ट : यू.जी.सी. का मेजर प्रोजेक्ट सम्पन्न। पुरस्कार : नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया द्वारा हिन्दी भाषा एवं साहित्य के लिए नागरी रत्न (2015), भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली से अम्बेडकर फेलोशिप (2011), महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी भुसावल से रवीन्द्रनाथ टैगोर लेखक पुरस्कार (2010)। प्रकाशित कृतियाँ : मन्नू भण्डारी के कथा-साहित्य में मानव जीवन की समस्याओं का निरूपण, मन्नू भण्डारी का कथा-संसार, उपन्यासकार धर्मवीर भारती, साठोत्तरी हिन्दी उपन्यास, मध्यकालीन हिन्दी काव्य, हिन्दी उपन्यास : नये आयाम, मीडिया लेखन, दृश्य-श्रव्य माध्यम : विविध परिप्रेक्ष्य, हिन्दी कथा-साहित्य में दलित विमर्श, हिन्दी महिला कथाकारों के साहित्य में नारी विमर्श, प्रेमचन्द के कथा-साहित्य में सामाजिक सरोकार, वाङ्गमय वाटिका के विविध रंग, दलित केन्द्रित हिन्दी उपन्यास, आदिवासी संवेदना और हिन्दी उपन्यास, इक्कीसवीं सदी का गद्य साहित्य, मकान पुराण (कहानी संग्रह)। आलेख : 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित।

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