Awadh Ki Tharu Janjati : Sankar Evam Kala

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-88434-32-4

Author:Deepa Singh Raghuvanshi

Pages:

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

अवध की थारू जनजाति : संस्कार एवं कला

Additional Information

'आदिवासी थारू जनजाति' भारत-नेपाल सीमा के दोनों तरफ़ तराई क्षेत्र में घने जंगलों के बीच निवास करती है जो कि भारत की प्रमुख जनजातियों में से उत्तर भारत की एक प्रमुख जनजाति है। उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र के तीन ज़िलों लखीमपुर खीरी, बहराइच व गोण्डा में थारू जनजाति निवास करती है। जहाँ अवध क्षेत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी का जन्म स्थान पावन धाम प्राचीन धार्मिक धर्म नगरी है और मेरा परम सौभाग्य है कि मेरा जन्म अवध के अयोध्या में हुआ है। वहीं अवध क्षेत्र की एक विशेषता रही है। थारू जनजाति का आवासित होना उनकी समृद्धि, संस्कृति व लोक परम्परा से युक्त उनका इतिहास गौरवशाली होना इनकी कला और संस्कृति का हमारी लोक संस्कृति के साथ घनिष्ठ सम्पर्क है। थारू जनजाति की सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, लोक कला अपने आप में लालित्यपूर्ण विधा है। इसका प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक इतिहास तक विस्तार है लेकिन कतिपय कारणों से यह अभी तक समृद्ध कला प्रकाश में नहीं आयी है। इनकी संस्कृति, सभ्यता अभी तक पूरे अवध और उसके बाहर भी प्रकाश में नहीं आयी है और ना ही प्रचार-प्रसार हुआ है। मेरा लक्ष्य है कि थारू जनजाति की लोक कला संस्कृति और लोक जीवन पद्धति जो कि हमारे अवध का एक गौरवशाली अंग है, इस पुस्तक के माध्यम से जन सामान्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। थारू जनजाति एक जनजाति ही नहीं एक लोक परम्परा है, इसको एक जाति के रूप में जब हम देखते हैं, तो पाते हैं कि इन्होंने हमारी एक विरासत को सँभाल कर रखा है जो अभी तक बची हुई और सुरक्षित है। इस संस्कृति, कला और परम्परा को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने, सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। थारू जनजाति राणा, कठरिया, चौधरी तीन जनजातियों में बँटी है। थारू जनजाति के लोग अवध की संस्कृति को अपनाते हुए राजस्थान के राजपूत राजा महाराणा प्रताप सिंह का वंशज मानते हैं। थारू हिन्दू धर्म को मानते हैं व हिन्दू धर्म के सभी त्योहारों को परम्परागत ढंग से मनाते हैं। यह लोग रीति-रिवाज, पहनावा, लोक नृत्य, गायन, परम्परागत ढंग से करते हैं। ये अपने सभी त्योहार मिलकर गाँव के सभी लोग एकत्रित होकर समवेत नृत्य व गायन के साथ मनाते हैं। थारू जनजाति लोक कला व हस्तशिल्प में बहुत पारंगत है-यह लोग टोकरी बुनना, रस्सी बुनना, डलिया बुनना, चटाई बुनना, कम्बल, बैग, दरी, लहंगा, ओढ़नी आदि परम्परागत ढंग से बनाते हैं। थारू जनजाति के लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि, पशुपालन, मछली मारना है। सर्वप्रथम मैं इस शोध सर्वेक्षण हेतु भगवान तुल्य, प्रत्यक्ष रूप से विद्यमान मेरे पिताजी श्री परमानन्द दास व माता श्रीमती उषा देवी जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ कि उन्होंने सदैव शुभ आशीष, साहस, प्रेरणा व दिशा प्रदान की। यह कार्य आपके मार्गदर्शन से ही सम्भव हो पाया है। आप सभी सहयोगी मित्रगण के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ। आप सभी के निरन्तर सहयोग, प्रेरणा, उत्साह, सहृदयता का सम्बल मिलता रहा जो इस शोध सर्वेक्षण कार्य को पूरा करने का कारण बना। मैं आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ। मैं आशा करती हूँ 'अवध की थारू जनजाति : संस्कार एवं कला' अवध के सभी जन के साथ भारतीय संस्कृति के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

About the writer

Deepa Singh Raghuvanshi

Deepa Singh Raghuvanshi जन्म : 22 जनवरी 1992, अयोध्या, फ़ैज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) शिक्षा : परास्नातक कार्य : ओजस्विनी लोक चित्रकार एवं रचनाकार, अवध की प्रमुख जनजातियों में थारू जनजाति के भित्ति चित्रों, लोकजीवन, संस्कृति, लोक पारम्परिक कला 'अवध की थारू जनजाति : संस्कार एवं कला' पर पुस्तक लेख, अवध के बारहमासा ऋतु के प्रमुख त्योहार, सोलह संस्कार, लोक परम्परा, लोक कला, भित्ति चित्रों पर सीरीज़ पेंटिंग तथा ‘मइहर के अँगना' पुस्तक लेख, 'अयोध्या पंचांग कैलेंडर में अवध के लोक जीवन में चौक पूरन के महत्त्व पर क्रमवार पेंटिंग। पुरस्कार : प्रथम पुरस्कार म्यूरल पेंटिंग प्रतियोगिता फ़ैजाबाद, सम्मान द्वितीय महिला पुरस्कार लखनऊ, द्वितीय पुरस्कार पेंटिंग प्रतियोगिता रामकथा प्रसंग अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय अयोध्या, सम्मान लोक कला एवं सामाजिक सेवा स्वच्छ भारत मिशन के तहत 'सज रही अयोध्या', 'सँवर रही अयोध्या' सम्मान युवा महोत्सव फैजाबाद, सम्मान संस्कार भारती द्वारा कला साधक लोक विद्या के लिए, सम्मान दिव्य दीपोत्सव, सम्मान एवं पुरस्कार अनेक छोटे-बड़े लोक कला पेंटिंग, पोस्टर पेंटिंग, गायन , मेहँदी, महावर, प्रशिक्षण कार्य, कार्यशाला आदि में। प्रशिक्षण कार्य : भित्ति चित्र कार्यशाला डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फ़ैजाबाद, श्रीराम औद्योगिक अनाथालय लखनऊ, राम नगरी में जी रहे अनाथ गरीब (मुफ़लिसी) बच्चों में शिक्षा के साथ कला के प्रति जीवन, अवधी लोक कला कार्यशाला अयोध्या शोध संस्थान संस्कृति विभाग, अवध की पुरातन लोक कला साकेत महाविद्यालय अयोध्या, फ़ैज़ाबाद, तुलसीदल कार्यशाला रामनगर बाराबंकी। इसके अलावा विद्यालय तथा महाविद्यालय में अनेक छोटे-बड़े कार्यशाला प्रशिक्षण कार्य। कार्यशाला में प्रतिभाग : 'राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव', काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, 'संस्कृति उत्सव', लखनऊ, उत्तर प्रदेश, लोक जीवन में राम, अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय अयोध्या, फ़ैज़ाबाद, दृश्य भूमि कार्यशाला, राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश। प्रदर्शनी : कई एकल एवं समूह प्रदर्शनी का आयोजन और प्रतिभाग अवध के पारम्परिक लोक चित्रों, लोक कला, क्राफ्ट कला, मूर्ति कला, चित्रकला, शिल्प कला का 'सज रही अयोध्या', 'सँवर रही अयोध्या', राम की पैड़ी अयोध्या, फ़ैज़ाबाद, राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, साकेत महाविद्यालय अयोध्या, फ़ैजाबाद, रामायण मेला महोत्सव, बाल मेला उत्सव अयोध्या। अन्य : संस्थापक, दीपा फोक एंड ट्राइबल आर्ट ग्रप, अयोध्या, फैजाबाद। ई-मेल : deeparagubansi@gmail.com

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