Jigar Se Bidi Jala Le

Format:Paper Back

ISBN:978-81-81436-11-5

Author:HULLAD MURADABADI

Pages:88

MRP:Rs.75/-

Stock:In Stock

Rs.75/-

Details

'जिगर से बीड़ी जला ले' श्री हुल्लड़ मुरादाबादी की ख्याती हास्य-व्यंग्य विधा के एक श्रेष्ठ कवि के रूप में हैं लेकिन उन्होंने जो दोहे और गज़लें कही हैं वे उन्हें एक दार्शनिक कवि के रूप में स्थापित करने के लिए पर्याप्त हैं। हास्य के लहज़े में कुछ शेर तो उन्होंने ऐसे कहे हैं जो बेजोड़ हैं और हज़ार-हज़ार लोगों की ज़ुबान पर है। हिन्दी में तो कोई भी हास्य का ऐसा कवि नहीं है जो उनकी गज़लों के सामने सर उठाकर खड़ा हो सके। उनका ये शेर तो हिन्दी कविता की ही नहीं, उर्दू भाषा की भी सम्पति है सबको इस रजिस्टर में हाजरी लगानी है मौत वाले दफ़्तर में छुट्टियाँ नहीं होती इसके अलावा और भी कितने ही शेर हैं जो हिन्दी गज़ल की उपलब्धि कहे जा सकते हैं। 'जिगर से बीड़ी जला ले' व्यंग्य गज़ल संग्रह के लिए हुल्लड़ जी को मेरी बहुत-बहुत बधाई। -पद्मश्री गोपाल दास 'नीरज' हुल्लड़ मुरादाबादी जन्मतिथि : 29-5-1942 जन्म स्थान : गुजरानवाला (जो अब पाकिस्तान में है)। 1964 से हिन्दी काव्य मंच पर। प्रकाशित पुस्तकालय संस्करण : हुल्लड़ का हुल्लड़, तथाकथित भगवानों के नाम (पुरस्कृत), सत्य की साधना, त्रिवेणी, हज्जाम की हजामत, इतनी ऊँची मत छोड़ो (व्यंग्य गज़ल संकलन), दमदार और दुमदार दोहे, हुल्लड़ हज़ारा, अच्छा है पर कभी कभी, ये अन्दर की बात है, क्या करेगी चाँदनी, मैं भी सोचूँ तू भी सोच, हुल्लड़ सतसई। कवि सम्मेलनीय विदेश यात्राएँ : अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, बैंकाक, हांगकांग। पुरस्कार : काका हाथरसी पुरस्कार, कलाश्री ठिठोली, हेपा पुरस्कार, महाकवि निराला सम्मान, टी ओ वाई पी माध्यम संस्थान लखनऊ द्वारा अट्टाहास शिखर पुरस्कार।

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About the writer

HULLAD MURADABADI

HULLAD MURADABADI मूल नाम : सुशील कुमार चड्ढा। जन्म : 29 मई, 1942 को गुजराँवाला (अब पाकिस्तान में)। प्रकाशन—‘इतनी ऊँची मत छोड़ो’, ‘क्या करेगी चाँदनी’, ‘ये अंदर की बात है’, ‘त्रिवेणी’, ‘तथाकथित भगवानों के नाम’, ‘मैं भी सोचूँ, तू भी सोच’, ‘हज्जाम की हजामत’, ‘अच्छा है पर कभी-कभी’, ‘हुल्लड़ हजारा’, ‘दमदार और दुमदार दोहे’, ‘जिगर से बीड़ी जला ले’ के अलावा दो ऑडियो कैसेट रिलीज। विदेश यात्राएँ : अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हांगकांग, बैंकॉक आदि अनेक देशों में काव्य-पाठ। सम्मान-पुरस्कार : ‘काका हाथरसी पुरस्कार’, ‘कलाश्री’, ‘अट्टहास शिखर सम्मान’, ‘महाकवि निराला सम्मान’, ‘हास्य रत्‍न’ तथा ‘टी.ओ.वाई.पी. पुरस्कार’। फिल्म ‘संतोष’ तथा ‘बंधन बाँहों का’ में अभिनय।

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