Ath Padmavati : Chittor Ki Rani Padmavati Ki Aithihasik Dastaan

Format:Paper Back

ISBN:978-93-88684-22-4

Author:RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

Pages:280

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

यह एक लवेबल (प्यारा) उपन्यास है। जो इतिहास में कम परन्तु लोक के आलोक में कई गुना अधिक ख्याति पा चुका है। ऐसी ख्याति कि कोई शोध उसकी स्थापित छवि-आभा को तनिक-सी भी ठेस नहीं पहुँचा सकता है। प्रायः ऐसा होता नहीं है। शताब्दियाँ खप जाती हैं, तब कहीं इतिहास का छोटा-सा टुकड़ा लोक साहित्य में शिखर पर पहुँचता है। यही जन-मन की अन्तरात्मा में मृग में बसी कस्तूरी की तरह समा जाता है। पद्मिनी जाति, पद्म योनि पद्मावती के साथ कुछ ऐसा ही हुआ जैसे प्रयाग के तीर्थराज बन जाने का। संगम तो नदी के उद्गम स्थान से मार्ग बढ़ते ही होने शुरू हो जाते हैं। अनेक नदियाँ मिलती जाती हैं परन्तु वे तीर्थराज नहीं बनते। पद्मावती अब एक आख्यान या पुराण कथा बन चुका है अर्थात् लेजेंड। उसमें प्रेम पराकाष्ठा पर जा पहुंचा है। प्रेम जिन गली-गलियारों से आगे बढ़ता है, उन्हें आनन्द के अमृत से ओत-प्रोत करता जाता है। इस उपन्यास में यह सब है, क्योंकि यह प्रेम की उन धड़कनों को पुनर्जीवित कर सका है, जिनको हम याद रखना चाहते हैं परन्तु जिनको हम अनुभव करने से वंचित रह जाते हैं। इसमें पद्मावती के बचपन से लेकर यौवन के अक्षय बसन्त की आम्रमंजरी, कस्तूरी और चन्दन-केसर की अनुभूतियाँ बसी हैं। आइए, वयःसन्धि की अनुभूतियों से जुड़ें।

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RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR जन्म : सन् 1938 अम्बाला (हरियाणा) में। रोहतक के ज़मींदार परिवार से। प्रकाशित वाङ्मय उपन्यास : दिल्ली चलो, गौरांग, दंश, नीले घोड़े का सवार, न गोपी : न राधा, स्वराज्य, कुली बैरिस्टर, राज राजेश्वर, सरदार, अन्तिम सत्याग्रही, रास्ता यह भी है, एक अन्तहीन युद्ध, रिवोल्ट, मोनालिसा, प्रेमदीवानी, युगपुरुष अंबेडकर, महाबानो, अमृत घट, ज़िन्दगी का एहसास, माटी की गन्ध, परिधि, माटी की पुकार, वैलेंटाइन डे, टूटे आकार, नया मसीहा, कायदे आजम, विवेकानन्द, तमसो मा ज्योतिर्गमय, सत्यमेव जयते, सर्वोदय, मंचनायक, अन्दर की आग, मन्ना बेगम, वसुधा, शुभप्रभात, वाग्देवी, जोगिन, अनन्त आकाश, खुदा गवाह है, श्याम प्रिया आदि 65 से अधिक उपन्यास। कहानी : बस्ती दर्द, मोम की उँगलियाँ, चाणक्य की हार, एक टुकड़ा धूप, माँग का सिन्दूर, थामली, गौरैया, अंजाम, सप्त किरण आदि 11 संग्रह। नाटक : माटी कहे कुम्हार से, मीरा, नायिका, सूर्यास्त का चोर, सारथिपुत्र, रक्तध्वज, सेनानी, दुरभिसंधि, शताब्दी पुरुष, ताम्रपत्र, सूर्याणी आदि 15 नाटक। आलोचना : आधुनिक हिन्दी कविता ग्रन्थ विचार, सामयिकी, महाकवि घनानन्द, सूरदास, कबीर, जैनेन्द्र और उनका समग्र साहित्य, जैनेन्द्र और निबन्ध साहित्य आदि बाईस ग्रन्थ। पुरस्कार : राजस्थान अकादमी का सर्वोच्च मीरा पुरस्कार, महाराणा कुम्भा पुरस्कार, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, नाहर सम्मान पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार। अनुवाद : अंग्रेज़ी, फ्रेंच, उड़िया, मराठी, कन्नड़, गुजराती आदि भाषाओं में।

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