Ambedkar Aur Gandhi

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-451-0

Author:Rajesh Kumar

Pages:88

MRP:Rs.295/-

Stock:In Stock

Rs.295/-

Details

गाँधी व अम्बेडकर के जीवन दर्शन के कई पक्ष अभी भी अछूते हैं, उन्हें बेहिचक लाने की ज़रूरत है। -मुद्राराक्षस इस सम्पूर्ण नाटक में गाँधी एक राजनीतिक व्यक्ति के बजाय अछूत समस्या का समाधान एक सन्त या महात्मा की तरह करते हुए दिखाई पड़ते हैं जब कि अम्बेडकर इस प्रश्न को धार देकर अपने संघर्ष को देश की आज़ादी के बजाय दलित मुक्ति की ओर ज़ोरदार ढंग से मोड़ देते हैं। -सुधीर विद्यार्थी, हंस रंगमंच पर इतिहास के दो बड़े नायकों को ज्वलन्त सामाजिक सवालों पर संवाद करते, समस्याओं से भरे इतिहास के उस जटिल दौर में आगे की राह तलाशते तथा वैचारिक रूप से गुत्थम-गुत्था होते देखना एक नया अनुभव है। -कौशल किशोर

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About the writer

Rajesh Kumar

Rajesh Kumar राजेश कुमार जन्म : 11 जनवरी 1958 को पटना में। शिक्षा : आरा में प्रारम्भिक शिक्षा और भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक। प्रकाशन : देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में एक दर्जन कहानियों एवं दो दर्जन से अधिक नुक्कड़ नाटक प्रकाशित। देश की विभिन्न नाट्य संस्थाओं द्वारा इन नाटकों की हज़ारों सफल प्रस्तुतियाँ। कुछ लेखों के मलयालम में अनुवाद। नुक्कड़ नाटक : जनतन्त्र के मुर्गे, हमें बोलने दो, ज़िन्दाबादमुर्दाबाद, क्रेन, रंगा सियार, भ्रष्टाचार का अचार। पूर्णकालिक नाटक : झोपड़पट्टी, आख़िरी सलाम, अन्तिम युद्ध, गाँधी ने कहा था, घर वापसी, मार पराजय, हवन कुंड, सत भाषे रैदास, असमाप्त संवाद, द लास्ट सैल्यूट, सुखिया मर गया भूख से, सपने हर किसी को नहीं आते, ट्रायल ऑफ एर्स, श्राद्ध। प्रकाशित कृतियाँ : हमें बोलने दो (नुक्कड़ नाटक संग्रह), जनतन्त्र के मुर्गे (नुक्कड़ नाटक संग्रह), जमीन हमारी है (नुक्कड़ नाटक संग्रह), कोरस का संवाद (नुक्कड़ नाटकों का सम्पादन) शताब्दी की परछाइयाँ (एकल नाटक संग्रह), नाटक से नुक्कड़ नाटक और मोरचा लगाता नाटक (नुक्कड़ नाटक लेख सम्पादन), झोपड़पट्टी (नाटक), आख़िरी सलाम (नाटक)। प्रसारण : आकाशवाणी पटना और भागलपुर से कई रचनाएँ प्रसारित। सम्मान : 2007 में 'नयी धारा रचना सम्मान', 2008 में साहित्य कला परिषद, दिल्ली की ओर से नाटक लेखन के लिए' 'मोहन राकेश सम्मान' और 2009 में 'राधेश्याम कथावाचक सम्मान' 2012 में दून घाटी रंगमंच, देहरादून द्वारा 'नाट्य रत्न सम्मान' और सेण्टर फॉर दलित आर्ट एण्ड लिटरेचर, नयी दिल्ली द्वारा 'प्रथम दलित अस्मिता सम्मान'।

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