Aasman Se Aage

Format:Paper Back

ISBN:978-93-87024-48-9

Author:RAJESH REDDY

Pages:130

MRP:Rs.100/-

Stock:In Stock

Rs.100/-

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आसमान से आगे

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राजेश की ग़ज़लें पढ़ते हुए मार्क ट्वेन की बात याद आती है। उसने एक लेख में लिखा था-अगर ज़ेहन सन्तुलित हो तो हर वस्तु में सौन्दर्य होता है और अगर यह सन्तुलन न हो तो सुन्दर से सुन्दर वस्तु भी गुस्सा जगा सकती है। राजेश ने अपनी ग़ज़ल में सामाजिक विरोधाभासों के प्रति क्रोध प्रकट करते हुए भी अपने कवि-ज़ेन का सन्तुलन नहीं खोया और यह खूबी उनकी ग़ज़ल को ग़ज़लों की भीड़ में एक अलग पहचान देती है। राजेश अपने मिज़ाज से समाज में हर बँटवारे के खिलाफ़ हैं, वह सियासत की उठायी भाषा विवाद की दीवार को ढहाते ही नहीं, परम्परा की टूटी-बिखरी कड़ियों को भी एक-दूसरे से मिलाते हैं। उनका ग़ज़लकार समाज में फैले हर अलगाव को नकारता है, इन अलगावों में सिर्फ भाषा ही नहीं, उनका विद्रोह हर उस चिन्तन से है जो आदमी को इन्सान बनने से रोकता है। उन्होंने इस विद्रोह की अभिव्यक्ति का माध्यम ग़ज़ल को बनाया है। राजेश की ग़ज़ल पढ़ी भी जाती है और गायी भी जाती है। यह दोनों लिपियों में होने के बावजूद हर रूप में आम आदमी की जुबान में और उसी के ज़रिये विवादों की गाँठे खोलती है। इस ग़ज़ल ने पिछली कतार के उसी अनाम वजूद से रिश्ता जोड़ा है जो सदियों से कभी धर्म से हँकाया जाता है, कभी राजनीति से बहकाया जाता है और कभी शोषण के अलावों में जलाया जाता है। अपने इस रचनात्मक रवैये का इज़हार उन्होंने अपने एक शे'र में यूँ किया है न जाने कितनी सारी बेड़ियों को पहन लेते हैं हम गहना समझ कर -निदा फ़ाज़ली

About the writer

RAJESH REDDY

RAJESH REDDY राजेश रेड्डी जन्म : 22 जुलाई 1952, जयपुर, राजस्थान भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता, नाटक कविता संग्रह : उड़ान, आसमां से आगे, वुजूद सम्मान : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सम्मान

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