Naitikta Ke Naye Sawaal

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-203-5

Author:RAJ KISHORE

Pages:168

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

नैतिकता के नए सवाल

Additional Information

पुरानी नैतिकता अब काफ़ी क्यों नहीं है? नई नैतिकता के मुख्य आधार क्या हैं? नैतिकता का वैश्वीकरण की प्रक्रिया से क्या रिश्ता है? क्या नैतिक लोकतन्त्र स्थापित किए बगैर वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है? आर्थिक नैतिकता की कौन-सी माँगें हैं? और स्त्री अधिकारों का प्रश्न? क्या मानव सम्बन्धों में एक बारीक नैतिक व्यवस्था बनाए बगैर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों में क्या वास्तविक रस पैदा हो सकता है? ये और इस तरह के अनेक प्रश्नों पर इस पुस्तक के लेखकों ने गम्भीरता से विचार किया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक वर्तमान समय की पड़ताल भी है और नैतिकता के स्रोतों को समझने की कोशिश भी। इन विचारपूर्ण और विचारोत्तेजक लेखों को पढ़ते हुए हम इस विचार के करीब आते जाते हैं कि नैतिकता सिर्फ़ व्यक्तिगत आदर्शवाद नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थागत प्रश्न भी है। यह भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि जब अनैतिकता का दबाव बढ़ रहा हो, तब नैतिक होने की प्रेरणा कहाँ से लाएँ?

About the writer

RAJ KISHORE

RAJ KISHORE राजकिशोर 2 जनवरी 1947 को कलकत्ता में जन्म। शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), एलएल.बी. तथा बी. कॉम. (ऑनस)। पत्रकारिता की शुरुआत अगस्त 1977 में आनंद बाजार पत्रिका समूह, कलकत्ता द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक 'रविवार' से। 1986-87 में साप्ताहिक 'परिवर्तन' का संपादन किया। 1987 से 1990 तक 'रविवार' के संयुक्त संपादक। 1990 से 1996 तक नवभारत टाइम्स, दिल्ली में वरिष्ठ सहायक संपादक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। मुख्यतः राजनीति, समाज एवं आर्थिक विषयों पर लेखन। संप्रति प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की त्रैमासिक पत्रिका 'विदुर' के संयुक्त संपादक। अन्य प्रकाशन : पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, आजादी एक अधूरा शब्द है, स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार, धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति, हिन्दी लेखक और उसका समाज, जाति कौन तोड़ेगा तथा तुम्हारा सुख (उपन्यास)। संपादन : समकालीन पत्रकारिता : मूल्यांकन और मुद्दे। सह-संपादन : मुसलमान क्या सोचते हैं। लोकप्रिय पुस्तक श्रृंखला ‘आज के प्रश्न' के संपादक, जिसके अंतर्गत अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पुरस्कार और सम्मान : पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1988 में लोहिया पुरस्कार, 1990 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान तथा 1995 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार द्वारा राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता पुरस्कार। 1996 में मध्य प्रदेश सरकार की राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता फेलोशिप।

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