Bharatiya Gram

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-696-5

Author:SHYAMA CHARAN DUBE

Pages:240

MRP:Rs.175/-

Stock:In Stock

Rs.175/-

Details

भारतीय ग्राम

Additional Information

भारत के ग्राम समुदायों में तेजी से सामाजिक परिवर्तन हो रहे हैं। सन 1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद से आधुनिकीकरण की दिशा में देश ने महत्त्वपूर्ण चरण उठाये हैं: बहु-उद्देशीय नदी-घाटी योजनाएँ, कृषि को यंत्रीकृत करने की योजनाएँ और नये उद्योगों को विकसित करने के कार्यक्रम सम्बन्धी कई राष्ट्रीय योजनाएँ कार्यान्वित हुईं जिन्होंने कुछ ही दशाब्दियों में ग्रामीण भारत का स्वरूप बदल दिया। भारतीय ग्राम समुदायों के परम्परागत जीवन और उनमें दीख पड़ने वाली सामाजिक परिवर्तन की प्रवृत्तियों का अध्ययन न केवल समाज के अध्येताओं के लिए, वरन् योजनाकारों, प्रशासकों और उन सबके लिए जिनकी मानव कल्याण और सामाजिक परिवर्तन में रुचि है, महत्त्व का है। यह पुस्तक एक भारतीय ग्राम की सामाजिक संरचना और जीवन-विधि का वर्णन प्रस्तुत करती है।

About the writer

SHYAMA CHARAN DUBE

SHYAMA CHARAN DUBE प्रो. श्यामाचरण दुबे का जन्म मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में 1922 में हुआ । उनकी गिनती भारत के अग्रणी समाज वैज्ञानिकों में होती है । उनकी अन्तर्राष्ट्रीय पहचान 1955 में ‘इंडियन विलेज’ के प्रकाशन से बनी । उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सम्मानों के अतिरिक्त मानद उपाधियों से समादृत किया गया है । भारत की जनजातियों और ग्रामीण समुदायों पर उनकी पुस्तकों को बहुत आदर से पढ़ा जाता है । उनकी कई पुस्तकों के अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं । हिन्दी साहित्य में उनकी बहुत गहरी रुचि रही है और वे जीवनपर्यन्त भारत के कई शीर्षस्थ सम्मानों की प्रवर समितियों से भी जुड़े रहे हैं । हिन्दी में उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं ‘मानव और संस्कृति’, ‘परम्परा और इतिहास-बोध’, ‘संस्कृति तथा शिक्षा’, समाज और भविष्य’, ‘भारतीय ग्राम’, ‘संक्रमण’ की पीड़ा’, ‘विकास का समाजशास्त्र’ और ‘समय और संस्कृति’ ।

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