Suman Aur Sana

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-825-6

Author:NADIRA ZAHEER BABAR

Pages:62

MRP:Rs.95/-

Stock:In Stock

Rs.95/-

Details

सुमन और सना

Additional Information

साम्प्रदायिक नफ़रत की वजह से होने वाले दंगे हमारे देश में कोई नई बात नहीं। इन दंगों की वजह से मिले मानसिक आघात के नियमितता के कारण ही शायद हमारा समाज सब मिलाकर धीरे-धीरे इन सब घटनाओं की तरफ से संवेदनहीन-सा होता जा रहा है। ‘सुमन और सना' एक कोशिश है इस मुद्दे से जुड़े इंसानियत की तड़प और तकलीफ़ के पहल पर ध्यान केन्द्रित करने की। नाटक दंगे के शिकार उन लोगों के बारे में है, जिन पर आक्रमण हुआ और जिन लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा। यह बिना किसी राजनीतिक उचितता और अनुचितता से सम्बद्ध हुए तकलीफ़ों को जीवन्त करता है। इस नाटक में, जो एक कोलाज की तरह लिखा गया है, दंगे में मारे गए लोगों की शरणार्थी शिविर की ज़िन्दगी की झलकियाँ प्रस्तुत की गई हैं। ये कहानी है उन लोगों के प्रयत्न की जो अपनी चोट और तकलीफ़ों को भुलाकर अपनी आज की परिस्थितियों के साथ समझौता करने की कोशिश में जुटे हैं। कहानी समय और अन्तराल को पार कर एक निःसहाय छोटी लड़की, जिसका नाम सुमन और सना है के आँखों देखी वृत्तान्त के रूप में पेश की गई है। उसकी आँखों के रास्ते हम देखते हैं कि कैसे एक आदमी दूसरे आदमी की वजह से अपमान आशंका और जोखिम से गुज़रता है, एक अनर्थ जिसे बशीर बद्र ने बहुत मर्मस्पर्मी शब्दों में पेश किया है“लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में,

About the writer

NADIRA ZAHEER BABAR

NADIRA ZAHEER BABAR रंगमंच सिनेमा और टेलीविजन की मशहूर कलाकार नादिरा जहीर बब्बर भारतीय कलाजगत में अपने कलाकर्म और सामाजिक सक्रियता के कारण जानी जाती हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नादिरा ने अपनी संस्था ‘एकजुट’ के माध्यम से रंगमंच के क्षेत्र में कई नये प्रतिमान कायम किए हैं। ‘आथेलो’, ‘तुगलक’, ‘जसमा ओढ़न’, ‘संध्या छाया’, ‘बेगम जान’ आदि नाटकों में केन्द्रीय भूमिकाएं निभाने के अलावा उन्होंने और ऐसे नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में अपनी नयी पहल कदमी के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। सुप्रसिद्ध चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के जीवन पर आधारित ‘पेंसिल से ब्रश तक’, धर्मवीर भारती की कालजयी कृतियों ‘कनुप्रिया’ एवं ‘अंधायुग’ पर आधारित ‘इतिहास तुम्हें ले गया कन्हैया’ और उत्तर पूर्व की पृष्ठभूमि पर ‘ऑपरेशन क्लाउडबर्स्ट’ सहित उन्होंने दर्जनों ऐसे नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में ऐसा कुछ नया जोड़ते हैं जिससे नयी पीढ़ी प्रभावित हो सकती है। प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक कामरेड सज्जाद ज़हीर की बेटी और मशहूर नेता-अभिनेता की राज बब्बर की पत्नी नादिरा का जन्म 20 जनवरी 1948 को हुआ था। इन दिनों वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसायटी की सम्मानित सदस्य हैं।

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