Nagpash

Format:Paper Back

ISBN:978-93-86799-86-9

Author:SUSHIL KUMAR SINGH

Pages:64

MRP:Rs.60/-

Stock:In Stock

Rs.60/-

Details

नागपाश

Additional Information

ख्यातनामा नाटककार सुशील कुमार सिंह का राजनीतिक-व्यंग्य नाटक जो आपातकाल में गली-कूचों और खेत-खलिहानों में उत्साही दर्शकों के बीच साहसपूर्वक खेला गया और अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। बिलकुल आधुनिक शेली के इस बहुचर्चित नाटक के छहों अनाम पात्र किसी एक व्यक्ति की बजाय एक समूची परिस्थिति, एक समूचे वातावरण और एक समूची सम्भावना के रूप में अपने आपको प्रस्तुत करते हैं। नाटक के बारे में दैनिक जागरण (कानपुर) ने लिखाः “सुशील कुमार सिंह का ‘नागपाश' एक प्रश्न-चिह्न है...आपातकाल से पूर्व, आपातकाल के दौरान और आपातकाल के बाद की स्थितियों और व्यवस्था पर तीखा प्रहार ‘नागपाश,' उन मुट्ठी भर लोगों को निर्वस्त्र करता है, जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों की रक्षार्थ सारे राष्ट्र को एक भयानक नागपाश में जकड़ दिया था... नाटककार का प्रश्न है – शासन बदला, सत्ता बदली, पर उनसे कोई कल्याण नहीं हुआ जनता का जो अब तक बैठे थे गद्दी पर, क्या उनसे भी कुछ होगा जो अब बैठे आ कर?' आज (वाराणसी) ने लिखा : “सुशील कुमार सिंह कृत 'नागपाश' आपातकालीन स्थितियों की भयानक तस्वीर पेश करता है। यह नाटक परम्परागत नाटकों से भिन्न प्रतीक शैली में उस अँधेरे दौर की व्यंग्यपूर्ण त्रासदी का जीवन्त दस्तावेज़ तथा दर्शकों को हिला देने वाली एक सीधी कार्रवाई भी है।" और जनयुग (नयी दिल्ली) का विचार था : “सत्ता में रह कर उसका दुरुपयोग करने वालों के ख़िलाफ़ यह एक ज़ोरदार आवाज़ है। जनता का मोहभंग अब नये हुक्मरानों के प्रति हो चुका है। दर्शकों द्वारा नाटक का उत्साहपूर्ण स्वागत इसका स्पष्ट प्रमाण है।"

About the writer

SUSHIL KUMAR SINGH

SUSHIL KUMAR SINGH सुशील कुमार सिंह 'सिंहासन खाली है' जैसे ख्याति प्राप्त नाटक के लेखक और 'बीबी नातियों वाली' जैसे मील के पत्थर धारावाहिक के निर्माता-निर्देशक सुशील कुमार सिंह ने कानपुर विश्वविद्यालय से बी. एस-सी. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नयी दिल्ली से नाट्य-निर्देशक तथा भारतीय फ़िल्म एवं टी. वी. संस्थान, पुणे से फ़िल्म एवं टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण-निर्देशन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। देश के विभिन्न भागों में पचास से अधिक नाटकों का निर्देशन, अनेकानेक नाट्य-शिविरों का संचालन, निर्देशन, अनेक टी.वी. धारावाहिकों, सौ से अधिक टी. वी. नाटकों, टेलीफ़िल्मों, वृत्तचित्रों आदि का निर्माण-निर्देशन किया। पूर्णकालिक नाटक : सिंहासन ख़ाली है, नागपाश, गुडबाई स्वामी, चार यारों की यार, अँधेरे के राही, बापू की हत्या हज़ारवीं बार, आज नहीं तो कल, आचार्य रामानुज, बेली तुम नादान, अलख आज़ादी की। नौलखिया दीवान,' नवीन नाटक है। 'ठग ठगे गये,' 'लोककथा कनुए नाई की, 'सुबह गयी है आय, वैसे तो सब खैर कुशल है,' 'विश्व-भ्रमण,' 'बापू के नाम बाल नाटिकाएँ, 'बाल लोक नाटिकाएँ,' आदि अनेक बाल नाटक भी लिखे हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality