San Sattavan Ka Kissa : Azizun Nisa

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-539-9

Author:Tripurari Sharma

Pages:86

MRP:Rs.95/-

Stock:In Stock

Rs.95/-

Details

सन सत्तावन का क़िस्सा अज़ीजुन निसा

Additional Information

गाँधी का अहिंसावाद तब राजनीति में प्रवेश नहीं कर पाया था। सन् सत्तावन का कानपुर बारूद और लहू से लथपथ और उसी शहर की मशहूर तवायफ़ अज़ीजुन निसा-जो सिपाही बनकर दोराहे पर खड़ी हुई। तवायफ़ से सिपाही और ख़ुद को सिपाही साबित करने की लगातार कोशिश यही है अज़ीजुन निसा की कहानी। नाटक, न केवल उसकी बहादुरी को उभारता है लेकिन आसपास के हालात पर रौशनी डालते हुए, आज के सन्दर्भ में जो कुछ सवाल उठाता है। जब चारों तरफ़ से वलवला उठता है-क्या हिंसा को टोका जा सकता है? क्या स्त्री केवल पुरुष बनकर ही स्वयं को प्रमाणित कर सकती है। अज़ीजुन जिस बिन्दु तक अपने सफ़र को ले आती है-वह उसके समर्पण की गाथा के साथ-साथ एक प्रश्नचिह्न भी है। इतिहास को सिर्फ़ याद करना काफी नहीं है-उस पर दूसरी नज़र से भी सोचा जाना चाहिए।

About the writer

Tripurari Sharma

Tripurari Sharma त्रिपुरारी शर्मा जन्म : 31 जुलाई 1956 दिल्ली में शिक्षित। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक-अब वहीं कार्यरत हैं। पिछले बीस सालों में रंगकर्म से जुड़ाव-लेखन, निर्देशन व संचालन में। कई क्षेत्रों में कार्यशालाएँ एवं नाटकों की प्रस्तुतियाँ की हैं। अन्य लिखे हुए एवं मंचित नाटक-अक्स पहेली, विक्रमादित्य का न्यायासन, विरसा मुण्डा, काठ की गाड़ी, रेशमी रुमाल, पोशाक सज़ा इत्यादि। संस्कृति पुरस्कार प्राप्त। 'मिर्च मसाला' एवं 'हजार चौरासी की माँ' फ़िल्म के संवाद लिखे। रंगकार्य के सिलसिले में श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंग्लैण्ड, नार्वे, अमेरिका, चीन एवं आस्ट्रेलिया में जाने का अवसर मिला।

Books by Tripurari Sharma

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality