Char Yaron Ki Yaar

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8679-987-6

Author:SUSHIL KUMAR SINGH

Pages:96

MRP:Rs.75/-

Stock:In Stock

Rs.75/-

Details

चार यारों की यार

Additional Information

प्रसिद्ध नाटककार सुशील कुमार सिंह ने जहाँ स्पष्ट रूप से राजनैतिक नाटक रचे हैं, वहीं सामाजिक स्थितियों को भी बड़े साहस के साथ अपने नाटकों में उकेरा है। उनका चर्चित और बोल्ड नाटक ‘चार यारों की यार' मुख्य पात्र बिन्दिया की त्रासदी के गिर्द बुना गया है। बिन्दिया की कहानी इस देश की अनेकानेक औरतों की व्यथा-कथा है : “दोष मैं किसे दूँ, सब भाग्य का ही खेल है। यदि मैं अपने पहले पति को छोड़ कर दूसरा ब्याह न रचाती...चौंकिए मत, कोई नयी बात नहीं कह रही हूँ..दूसरा ब्याह करना कोई गुनाह तो नहीं है और वह भी तब जबकि किसी स्त्री का पति हर रोज़ नशे में धुत्त हो कर लौटे और अपनी पत्नी को बेजुबान जानवर समझ बेरहमी से पीटना शुरू कर दे...लात, घूसे, थप्पड़ या जो कुछ भी हाथ में आ जाये-जलती हुई लकड़ी, जूते या लोहे की रॉड...कब तक सहती-आखिर कब तक..." लेकिन दूसरे ब्याह से भी बिन्दिया को वह सुख-चैन नहीं मिलता जिसकी वह उम्मीद लगाये बैठी थी। यहीं से बिन्दिया की भटकन की कहानी शुरू होती है और उसका अन्त उसी के हाथों दूसरे पति की हत्या में होता है। और अन्त में जब बिन्दिया कहती है : “लेकिन आप कर भी क्या सकते हैं? उससे बड़ी सज़ा भी क्या आप दे सकते हैं जो मैंने भुगती है? शराबी पति का कसाईपन... नामर्द आदमी की घुटन...दलालों जैसा प्रेमी...छि....” तो उस समाज के प्रति एक भयंकर क्रोध मन में जागता है जहाँ बिन्दिया जैसी औरतों के लिए सुकून की कोई जगह नहीं है। सुशील कुमार सिंह ने इस नाटक में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को कई पहलुओं से अंकित किया और जाँचा-परखा है और ऐसे चुस्त नाटकीय लिबास में पेश किया है जो कथ्य को मंच पर पूरी तरह उभारने में सफ़ल है।

About the writer

SUSHIL KUMAR SINGH

SUSHIL KUMAR SINGH सुशील कुमार सिंह 'सिंहासन खाली है' जैसे ख्याति प्राप्त नाटक के लेखक और 'बीबी नातियों वाली' जैसे मील के पत्थर धारावाहिक के निर्माता-निर्देशक सुशील कुमार सिंह ने कानपुर विश्वविद्यालय से बी. एस-सी. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नयी दिल्ली से नाट्य-निर्देशक तथा भारतीय फ़िल्म एवं टी. वी. संस्थान, पुणे से फ़िल्म एवं टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण-निर्देशन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। देश के विभिन्न भागों में पचास से अधिक नाटकों का निर्देशन, अनेकानेक नाट्य-शिविरों का संचालन, निर्देशन, अनेक टी.वी. धारावाहिकों, सौ से अधिक टी. वी. नाटकों, टेलीफ़िल्मों, वृत्तचित्रों आदि का निर्माण-निर्देशन किया। पूर्णकालिक नाटक : सिंहासन ख़ाली है, नागपाश, गुडबाई स्वामी, चार यारों की यार, अँधेरे के राही, बापू की हत्या हज़ारवीं बार, आज नहीं तो कल, आचार्य रामानुज, बेली तुम नादान, अलख आज़ादी की। नौलखिया दीवान,' नवीन नाटक है। 'ठग ठगे गये,' 'लोककथा कनुए नाई की, 'सुबह गयी है आय, वैसे तो सब खैर कुशल है,' 'विश्व-भ्रमण,' 'बापू के नाम बाल नाटिकाएँ, 'बाल लोक नाटिकाएँ,' आदि अनेक बाल नाटक भी लिखे हैं।

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