Khamoshi Ke Us Paar

Format:Paper Back

ISBN:978-93-86799-98-2

Author:URVASHI BUTALIYA

Pages:316

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

खामोशी के उस पार

Additional Information

भारत का बँटवारा (1947) इतिहास के चंद गंभीरतम झंझावातों में एक था। एक करोड़ बीस लाख लोग बेघर हो गए, दस लाख जानें गईं; पचहत्तर हजार स्त्रियों के बारे में कहा जाता है कि वे अगवे और तरह-तरह की जबरदस्तियों का शिकार हुईं; परिवार बिखरे; संपत्ति छूटी; और घर उजड़े। इन तमाम हिंसक तथा आप्लावनकारी घटनाओं की यादें अब जन स्मृति की चुप्पियों में खोई हुई हैं। देश विभाजन से प्रभावित असंख्य लोग, लेकिन जब अपने अकेलेपन के साथ होते हैं, इन चुप्पियों के परदे हटने लगते हैं और उन भयावह दिनों की दस्तक सुनाई देने लगती है क्योंकि इनकी देहों और आत्माओं पर उन जख्मों की खरोंचें अभी भी बनी हुई हैं जो 1947 के उन खूनी दिनों की देन है। उर्वशी बुटालिया की यह विलक्षण पुस्तक लगभग एक दशक के शोध कार्य, सैकड़ों स्त्रियों, प्रौढ़ों और बच्चों से लंबी अंतरंग बातचीत और ढेर सारे दस्तावेजों, रिपोर्टों, संस्मरणों, डायरियों तथा संसदीय रिकॉर्डों के आधार पर लिखी गई है। इसके पन्ने-पन्ने पर उन बेशुमार आवाजों और वृत्तांतों को संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है जो आजादी हासिल करने के पचास साल बाद भी हृदयहीनता और उपेक्षा के मलबे में दबी पड़ी थीं-क्योंकि उनसे मुठभेड़ करने का साहस हम नहीं जुटा पाए हैं। इस मुठभेड़ के बगैर यह समझ पाना मुश्किल है कि किन लक्ष्यों को ध्यान में रखकर विभाजन स्वीकार किया गया था और हकीकत में क्या-क्या घटित हुआ-खासकर महिलाओं के साथ।

About the writer

URVASHI BUTALIYA

URVASHI BUTALIYA उर्वशी बुटालिया भारत के प्रथम और एकमात्र स्त्रीवादी प्रकाशनगृह काली फॉर वीमेन की सह-संस्थापक हैं। वे भारत के नागरिक तथा स्त्री अधिकारों के आंदोलनों में शरीक रही हैं और स्त्रियों, मीडिया और सांप्रदायिकता से जुड़े हुए मुद्दों पर लिखती हैं। उर्वशी ने वीमेन एंड दी हिंदू राइट : एकलेक्शन ऑफ एस्सेज और इन अदर वर्ल्डस् : न्यू राइटिंग बाइ वीमेन इन इंडिया का सह-संपादन किया है।

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