PLATO KE KAVYA-SIDDHANT

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-782-2

Author:DR. NIRMLA JAIN

Pages:

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

पाश्चात्य काव्य-चिन्तन के इतिहास में प्लेटो की उपस्थिति एक ऐतिहासिक घटना है। काव्य के निषेध के लिए अनुकरण-सिद्धान्त को आधार बनाने के बावजूद उन्होंने काव्य-सृजन और आस्वाद के मूल में सक्रिय सहज मानवीय वृत्तियों की प्रतिष्ठा की। काव्य में नैतिक मूल्यों पर उन्होंने अपेक्षित बल दिया। दर्शन और नैतिक मानदंडों पर आधारित होने पर भी उनका चिन्तन जटिल पारिभाषिक शब्दावली से मुक्त था। सर्जनात्मकता उनकी शैली का प्रमुख आकर्षण है। वे परवर्ती रोमांटिक काव्य-चिन्तन के प्रमुख प्रेरणा स्रोत रहे। इस दृष्टि से उनका स्थायी महत्त्व है। प्रस्तुत पुस्तक उनके योगदान का आकलन करती है। अपनी इस रचना के बारे में प्रख्यात आलोचक निर्मला जैन का कहना है, ‘मुझे अपने आरम्भिक साहित्यिक प्रयास विद्यार्थी मन की जिज्ञासाओं के संपोषण और परितोष का प्रयत्न ही लगते थे। यह इसलिए, कि अंग्रेजी भाषा से अनभिज्ञ पाठक भी इस कृति के माध्यम से प्लेटो के काव्य-सिद्धान्तों की जानकारी हासिल कर सकेगा और इसके लिए अतिरिक्त साधन की अपेक्षा या अपर्याप्तता का बोध उसके मन में नहीं उपजेगा।’ -निर्मला जैन

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About the writer

DR. NIRMLA JAIN

DR. NIRMLA JAIN जन्म : 28 अक्टूबर, 1932, दिल्ली भाषा : हिंदी विधाएँ : आलोचना, संस्मरण मुख्य कृतियाँ आलोचना : आधुनिक हिंदी काव्य में रूप-विधाएँ, रस सिद्धांत और सौंदर्यशास्त्र, आधुनिक साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन, हिंदी आलोचना की बीसवीं सदी, आधुनिक हिंदी काव्य : रूप और संरचना, पाश्चात्य साहित्य चिंतन, कविता का प्रतिसंसार, कथा-समय में तीन हमसफ़र संस्मरण : दिल्ली : शहर दर शहर संपादन : अंतस्तल का पूरा विप्लव : अँधेरे में, इतिहास और आलोचना के वस्तुवादी सरोकार, महादेवी साहित्य (महादेवी वर्मा का संपूर्ण साहित्य - चार खंडों में), निबंधों की दुनिया (किताबों की श्रृंखला जिसमें हिंदी के अनेक मूर्धन्य निबंधकारों के प्रतिनिधि निबंध शामिल हैं) अनुवाद : उदात्त के विषय में, बंगला साहित्य का इतिहास, समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएँ, साहित्य का समाजशास्त्रीय चिंतन, भारत की खोज सम्मान हरजीमल डालमिया पुरस्कार, तुलसी पुरस्कार, रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य भूषण सम्मान, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान (हिंदी अकादेमी, दिल्ली), सुब्रह्मण्यम भारती (केंद्रीय हिंदी संस्थान) संपर्क ए-20/17, डी.एल.एफ. फेज-1, गुड़गाँव - 122002 (हरियाणा)

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