Dalit Painther

Format:Paper Back

ISBN:978-93-89012-21-7

Author:DR. SHARANKUMAR LIMBALE

Pages:240

MRP:Rs.399/-

Stock:In Stock

Rs.399/-

Details

दलित पैन्थर

Additional Information

कलाकार और लेखकों से भारतीय जनता की बड़ी अपेक्षाएँ रही हैं। लोकसत्ता समाजवादी राष्ट्र के नाते भारत को खड़ा करने के लिए इन बातों की आवश्यकता भी है, जो आम आदमी के बारे में लिखते हैं, जो आम आदमी की बोली में बोलते हैं, वही सही लेखक होते हैं। दलितों का संघर्ष सांस्कृतिक संघर्ष भी है। दलित आन्दोलक जब प्रस्थापितों के विरुद्ध आन्दोलन करते हैं, उस समय दलित लेखकों को इन कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहिए। उनको प्रेरणा मिले इस पद्धति का लेखन करना चाहिए। मराठी साहित्य में, भारतीय वर्णवादी साहित्य में गम्भीर वैचारिक गलतियाँ हुई हैं। इस बारे में दलित लेखकों को लिखना चाहिए।

About the writer

DR. SHARANKUMAR LIMBALE

DR. SHARANKUMAR LIMBALE 1 जून, 1956 को जन्मे डॉ. शरणकुमार लिंबाले ने एम.ए. , पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। ‘अक्करमाशी’ (आत्मकथा) , ‘‘छुआछूत’, ‘‘देवता आदमी’, ‘‘दलित ब्राह्मण’ (कहानी संग्रह) , ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ (समीक्षा) , ‘नरवानर’, ‘हिंदू’, ‘बहुजन’ (उपन्यास) आपकी हिन्दी में प्रकाशित कृतियाँ हैं। आप नासिक (महाराष्ट्र) के यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी कल्याण विभाग के प्रोफेसर और डायरेक्टर हैं।

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