Rangbhumi

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-157-8

Author:Surendra Sharma

Pages:80

MRP:Rs.75/-

Stock:In Stock

Rs.75/-

Details

रंगभूमि

Additional Information

मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित वृहद् उपन्यास 'रंगभूमि' पर आधारित नाट्य रूपांतरण आपके कर कमलों में है। 'रंगभूमि' की व्याख्या हम संसार रूपी रंगमंच और जीवन रूपी ‘युद्धभूमि' दोनों ही तरह से कर सकते हैं क्योंकि जहाँ एक तरफ हर मनुष्य अपना-अपना पार्ट अदा कर रहा है, वहीं जीने के लिए वह हर प्रकार की जद्दोजहद भी कर रहा है। 'रंगभूमि' बात करता है पूंजीवाद बनाम आदर्शवाद की, बात करता है एक ऐसे भिखारी की जो साधनहीन होते हुए भी सम्पन्न है और ऐसे साधन सम्पन्न व्यक्ति की जो सब कुछ होते हुए भी भिखारी है। 'रंगभूमि' अध्ययन है मनोविज्ञान के वृहद् व जटिल संसार का जहाँ एक ही जीवन में हम सब स्वार्थ, ईर्ष्या, कपट, मोह, बदला आदि विभिन्न भावों के वशीभूत समय-समय पर गिरगिट की तरह अपना रंग बदलते रहते हैं। 'रंगभूमि' बोध कराता है जीवन-रूपी क्रीड़ा-स्थल के खेल में उस खेल भावना की जहाँ हम एक बार जीत कर इतरायें नहीं कि अब कभी हार नहीं होगी और हार कर निराश न हों कि अब कभी जीत ही नहीं होगी।

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