Ravan,Tum Bahar Aao !

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-850-0

Author:SHANKAR PUNTAMBEKAR

Pages:80

MRP:Rs.95/-

Stock:In Stock

Rs.95/-

Details

रावण, तुम बाहर आओ!

Additional Information

व्यंग्य में हरिशंकर परसाई जैसा तीखा लेखन करने वाले अग्रणी व्यंग्यकारों में शंकर पुणतांबेकर का नाम लिया जाता है। प्रस्तुत नाटक एक व्यंग्य नाटक है। इसके संवाद, प्रसंग, प्रतीक, घटना रचना, पात्र, वातावरण - सभी में से व्यंग्य आप फूटता जाता है। यह यथार्थ के प्रति ऐसा प्रतिबद्ध है कि इसमें कहीं फूहड़ता अथवा अनौचित्य नहीं। यथार्थ राजनीतिक पतन का, वास्तव में पतन का एक टुकड़ा, टुकड़ा पर जो व्यवस्था की सड़न का लम्बा इतिहास नंगा करके रख देता है, पूरी तिक्तता के साथ कदम-कदम पर विचारोत्तेजक। यहाँ वाह वाह नहीं आह आह है। संक्षेप में नाटक को तिक्त यथार्थ का लावा उगलता ‘शब्दों का ज्वालामुखी' कहा जा सकता है। यह नाटक नवमंच वालों के लिए एक अनोखी देन सिद्ध होगा।

About the writer

SHANKAR PUNTAMBEKAR

SHANKAR PUNTAMBEKAR शंकर पुणतांबेकर एक विचारोत्तेजक व्यंग्यकार हैं। महाराष्ट्र के निवासी हैं, पर मूलतः मध्य प्रदेश के हैं। शिक्षा-दीक्षा विदिशा, ग्वालियर में हुई। आरम्भिक नौकरी विदिशा जैन इंटर कॉलेज़ में। आगे जलगाँव के मूलजी जेठा कॉलेज में 25 से अधिक व्यंग्य पुस्तकों का लेखन जिनमें व्यंग्य अमरकोश, बाअदब बेमुलाहजा तथा फर्जी से पैदा भयो विशेष उल्लेखनीय मालरोड मर्डर, सफेद कौए काले हंस नाटक शीघ्र प्रकाश्य। 1985 में सेवानिवृत्त।

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