Kahne Ko Bahut Kuch Tha

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8901-271-2

Author:Kusum Ansal

Pages:192

MRP:Rs.399/-

Stock:In Stock

Rs.399/-

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कहने को बहुत कुछ था

Additional Information

“मेरा ननिहाल था रावलपिण्डी। घर से मेरी नानी जितने दिन जीवित रहीं, एक उदास चुप्पी का पुराना सालू समेटे, बिछुड़ा हुआ अतीत जीती रहीं। उनके पैर के तलवे का ज़ख्म जो घर की ड्योढ़ी लाँघते समय उन्हें ख़ूनो-ख़ून कर गया था। उनकी मृत्यु तक बराबर रिसता रहा। आँसू जैसे आँखों से नहीं पैर की मवाद में बहते रहे...। तब तक जब तक उन्होंने नब्बे वर्ष की उम्र में निवाड़ की चारपाई पर, निःशब्द दम तोड़ दिया। वह अपने नित्य के नाटक से बाहर चली गयीं। दिल्ली के घर के रंगमंच पर से विदा लेकर उस पृष्ठभूमि में जहाँ वह अभिनय का एक बेबस पात्र नहीं, वह स्वयं थीं अकेली अपनी पुरानी रावलपिण्डी की 'रलियाराम हवेली' से रुख़सत लेती हुई। तब से बचपन से नानी की रावलपिण्डी, पाकिस्तान कहीं मेरे भीतर तिलस्म...रूमानियत...दर्द सा सरसराता रहा। फिर मेरे जाने-अनजाने एक फैस्सीनेशन में बदल गया। - 'एक संस्मरण का अंश'

About the writer

Kusum Ansal

Kusum Ansal उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में जन्मी कुसुम अंसल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से सन् 1961 में मनोविज्ञान में एम.ए. किया। सन् 1987 में ‘आधुनिक हिन्दी कुसुम अंसल साहित्य में महानगरीय बोध' विषय पर पंजाब विश्वविद्यालय चंझडीगढ़ से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। कुसुम अंसल के अब तक 10 उपन्यास, 6 कविता संग्रह, 8 कहानी संग्रह, 4 यात्रा-वृत्तान्त तथा महिला रचनाकारों में पहली आत्मकथा का प्रकाशन। उनके लेखन का पंजाबी, उर्दू, ग्रीक, रूसी तथा बंगला भाषा में अनुवाद इसके अतिरिक्त अंग्रेज़ी में भी उनकी 7 रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके उपन्यास ‘एक और पंचवटी' पर बासु भट्टाचार्य द्वारा ‘पंचवटी' फ़िल्म का निर्माण जो 'पैनोरमा' में चयनित भी हुई थी। तीन टी.वी. सीरियल 'तितलियाँ', 'इसी बहाने' तथा 'इन्द्रधनुष' भी लिखे। दो नाटक 'रेखाकृति' व ‘उसके होंठों का चुप' फैज़ल अलकाजी द्वारा निर्देशित, मंचित तथा प्रशंसित हुए थे। पुरस्कार : उत्तर प्रदेश नामित ‘महादेवी वर्मा पुरस्कार’-2004, हिन्दी अकादमी ‘साहित्यकार सम्मान’-2005, हिन्दी अकादमी (उ.प्र.) 'साहित्य भूषण'-2006 (I.W.E.C International Women's Entrepreneurial Challenges Award) द. अफ्रीका (South Africa)- 2010, 'श्री विद्यानिवास स्मृति पुरस्कार', बनारस-2012, 'वातायन लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार', लन्दन-2018, 'भारतीय भाषा परिषद् कर्तव्य समग्र सम्मान' (कोलकाता) 2019 । सम्पर्क : ‘विश्रांति', 26 फ़िरोज़शाह रोड, नयी दिल्ली-110001 ई-मेल : kusumansal@gmail.com

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