NIRJAN BAN KE PAAR

Format:Paper Back

ISBN:81-8143-401-3

Author:RAMESH CHANDRA DWIVEDI

Pages:102


MRP : Rs. 150/-

Stock:In Stock

Rs. 150/-

Details

निर्जन बन के पार

Additional Information

अभी तक जो कुछ भी लिखा है वह लिखना तो आसान है, पर कविता पर लिखना बड़ा मुश्किल काम है। मैं सोचने लगी कि कैसे और क्या लिखू और बात कहाँ से शुरू की जाए। नाना हर बात को बड़ी गहराई से सोचते हैं। मुझसे भी कहते हैं कि बेटी सोचा करो-बुद्धि का इस्तेमाल करो। ठीक है। मगर कुछ काम ऐसे भी करने पड़ते हैं जो बुद्धि को चक्कर में डाल देते हैं। मेरे लिए कविताओं पर इण्ट्रोडक्शन लिखना भी कुछ ऐसा ही है। बहरहाल मैं सोचने लगी। रात-दिन यही सोचती थी कि कैसे शुरू करूँ। वाकई, नाना ठीक कहते हैं कि जब मन को ईमानदारी से किसी काम पर लगा दो तो मन खुद अपने आप रास्ता बनने लगता है। मैनें भी इस काम को एक चैलेन्ज मान कर स्वीकार कर लिया। सोते समय प्रार्थना करके सोती, उठते समय प्रार्थना करके उठती कि हे मेरे मन तुम मेरी सहायता करो और कोई रास्ता निकालो। - ज्योत्सना त्रिपाठी

About the writer

RAMESH CHANDRA DWIVEDI

RAMESH CHANDRA DWIVEDI रमेश चन्द्र द्विवेदी उर्फ़ शौक़—मिर्ज़ापुरी का जन्म 6 अगस्त, 1935 को ग्राम तरकापुर- मिर्ज़ापुरी में हुआ। पिता का नाम पं. शिवदेव द्विवेदी था। फ़िराक़ के कृतित्व व साहित्य की अन्य विधाओं पर हिन्दी में लगभग तीस, अंग्रेज़ी में लगभग चालीस व उर्दू में लगभग पैंतीस लेख प्रकाशित। कवि सम्मेलन व मुशायरों में शिरकत। दर्शन, अध्यात्म और विज्ञान में विशेष रुचि। प्रकाशित कृतियाँ ‘फ़िराक़ साहब’ — (संस्मरण) हिन्दी व उर्दू में। ज़िक्र-ए- फ़िराक़ : 1. मैंने फ़िराक़ को देखा था 2. मेरे नग़्मों को नींद आती है उर्दू की इश्क़िया शायरी, आदमी (नाटक, फ़िराक़ साहब द्वारा जर्मन भाषा से अनूदित), ‘शबनमिस्ताँ’, ‘रम्ज़-ओ-कियानात’, ‘रूह-ए-कायनात’, ‘नौरत्न’ (फ़िराक़ की कहानियाँ), ‘धरती की करवट’, ‘नज़ीर की बानी’, ‘जंज़ीरें टूटती हैं’ और ‘राग-विराग’ आदि पुस्तकों की प्रस्तुति। सम्मान प्रयाग की साहित्य और सांस्कृतिक संस्था अरुणिमा द्वारा ‘साहित्य मणि’ सम्मान, इंटरनेशनल लायन्स क्लब, इलाहाबाद द्वारा साहित्य सौरभ सम्मान।

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