Hasya-Vyangya Evam Samajik Natak (3 Volume Set)

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8788-914-9

Author:DAYA PRAKASH SINHA

Pages:

MRP:Rs.2697/-

Stock:In Stock

Rs.2697/-

Details

हास्य-व्यंग एवं सामाजिक नाटक (3 वॉल्यूम सेट)

Additional Information

अपने कथ्य के आधार पर, नाटक प्रायः तीन प्रकार के होते हैं। पहला : व्यक्ति-केन्द्रित नाटक, दूसरा : घटना-केन्द्रित नाटक तथा तीसरा : विचार-केन्द्रित नाटक दया प्रकाश सिन्हा के नाटक विचार-केन्द्रित हैं। उनमें निहित विचार, उनके नाटकों की विशिष्टता है। इसी कारण उनके नाटक अध्येताओं द्वारा स्वीकार किये गये हैं। अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं; और अनेक शोधार्थी उनपर शोध कर रहे हैं/कर चुके हैं। नाटक का निकष होता है-रंगमंच। दया प्रकाश सिन्हा को, जो अन्य स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी नाटककारों की भीड़ से अलग प्रतिष्ठित करता है, वह है उनका रंगमंच से अभिनेता और निर्देशक के रूप में दीर्घकालीन जुड़ाव और अनुभव। यह उनके नाटकों को अतिरिक्त धार देते हुए मंचसिद्ध करता है। यह है उनके नाटकों की रंगकर्मियों में अभूतपूर्व लोकप्रियता का रहस्य। निःसन्देह आज दया प्रकाश सिन्हा की मान्यता हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार के रूप में है। तीन खण्डो में प्रकाशित 'दया प्रकाश सिन्हा : नाट्य समग्र' में नाटकों का संयोजन निम्नवत है नाट्य-समग्र : खण्ड-1 साँझ-सवेरा, पंचतन्त्र, मन के भँवर, अपने अपने दाँव, दुस्मन तथा हास्य-एकांकी। नाट्य-समग्र : खण्ड-2 मेरे भाई-मेरे दोस्त, सादर आपका, इतिहास-चक्र, राग-बिदेसी (ओह अमेरिका) तथा इतिहास। नाट्य-समग्रः खण्ड-3 कथा एक कंस की, सीढ़ियाँ, रक्त-अभिषेक तथा सम्राट अशोक।

About the writer

DAYA PRAKASH SINHA

DAYA PRAKASH SINHA हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ नाटककार दया प्रकाश सिन्हा की रंगमंच के प्रति बहुआयामी प्रतिबद्धता है। पिछले चालीस वर्षों में अभिनेता, नाटककार, निर्देशक, नाट्य-अध्येता के रूप में भारतीय रंगविधा को उन्होंने विशिष्ट योगदान दिया है। दया प्रकाश सिन्हा अपने नाटकों के प्रकाशन के पूर्व, स्वयं उनको निर्देशित करके संशोधित/संवर्धित करते हैं। इसलिए उनके नाटक साहित्यगत/कलागत मूल्यों को सुरक्षित रखते हुए मंचीय भी होते हैं। दया प्रकाश सिन्हा के प्रकाशित नाटक हैं- मन के भँवर, इतिहास चक्र, ओह अमेरिका, मेरे भाई: मेरे दोस्त, कथा एक कंस की, सादर आपका, सीढ़ियाँ, अपने अपने दाँव, साँझ-सबेरा, पंचतंत्रा लघुनाटक (बाल नाटक), हास्य एकांकी (संग्रह), इतिहास, दुस्मन, रक्त-अभिषेक तथा सम्राट अशोक। दया प्रकाश सिन्हा नाटक-लेखन के लिए केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी, नयी दिल्ली के राष्ट्रीय ‘अकादमी अवार्ड’, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के ‘अकादमी पुरस्कार’, हिन्दी अकादमी, दिल्ली के ‘साहित्य-सम्मान’, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के ‘साहित्य भूषण’ एवं ‘लोहिया सम्मान’, भुवनेश्वर शोध संस्थान के भुवनेश्वर सम्मान, आदर्श कला संगम, मुरादाबाद के ‘फ़िदा हुसैन नरसी पुरस्कार’, डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल स्मृति फाउंडेशन के ‘डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल स्मृति सम्मान’ तथा नाट्यायन, ग्वालियर के ‘भवभूति पुरस्कार’ से विभूषित हो चुके हैं। नाट्य-लेखन के अतिरिक्त दया प्रकाश सिन्हा की रुचि लोक कला, ललित कला, पुरातत्त्व, इतिहास और समसामयिक राजनीति में भी है। दया प्रकाश सिन्हा आई. ए. एस. से अवकाश-प्राप्ति के पश्चात् स्वतन्त्र लेखन और रंगमंच से सम्बद्ध हैं।

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