Upanyas : Isthati Aur Gati

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-240-7

Author:CHANDRAKANT VANDIVADEKAR

Pages:418

MRP:Rs.695/-

Stock:In Stock

Rs.695/-

Details

उपन्यास: स्थिति और गति

Additional Information

चन्द्रकान्त बान्दिवडेकर ने अपनी समीक्षा दृष्टि इस पुस्तक में उपन्यासों की तरफ़ फेरी है और कुछ चुने हुए उपन्यासों का पुनर्मूल्यांकन किया है। जैसा कि उन्होंने ख़ुद अपनी लम्बी भूमिका में माना है, 'उपन्यास विधा के सामने बाह्य संकटों ने भी ख़तरे पैदा किये हैं। जिस तरह चित्र-सृष्टि ने नाटक के लिए ख़तरा उत्पन्न किया उसी प्रकार उपन्यास विधा के लिए आकाशवाणी, चित्रवाणी तथा चित्रसृष्टि - तीनों ने ख़तरा उत्पन्न किया है। ख़तरा यह है कि गम्भीर स्तर पर उपन्यास जनता से सम्बाद करने की स्थिति में नहीं रहा। इस खतरे को पहचानने के बाद चन्द्रकान्त बान्दिवडेकर ने बदले हुए समय और परिस्थितियों के सन्दर्भ में हिन्दी के कुछ चुने हुए चर्चित उपन्यासों का मूल्यांकन फिर से करने की कोशिश की है। इन उपन्यासों में अगर एक ओर 'नदी के द्वीप' जैसा उपन्यास है तो दूसरी ओर ‘परती परिकथा,' 'कब तक पुकारूँ,' 'अमृत और विष,' 'आधा गाँव,' 'अलग-अलग वैतरणी,' 'ऋतुचक्र,' 'मुक्तिबोध, धूप छाँही रंग.' 'आपका बंटी. 'अपने-अपने अजनबी,' 'विपात्र,' 'राग-दरबारी,' 'मनुष्य के रूप,' 'अनाम स्वामी,' 'चित्रलेखा,' 'दिव्या,' 'बाणभट्ट की आत्मकथा,' 'मेरी तेरी उसकी बात,' 'बीज,' 'मुर्दाघर' और 'अनुत्तर योगी' इन सारे उपन्यासों पर अपनी गहरी समस्या दृष्टि डालते हुए चन्द्रकान्त बान्दिवडेकर ने उपन्यास से सम्बन्धित कुछ बुनियादी प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास किया है। मिसाल के लिए उपन्यास विधा की आन्तरिकता का स्वरूप क्या है? क्या उपन्यास की आलोचना की नयी परिभाषा बनाना सम्भव है? चन्द्रकान्त बान्दिवडेकर ने बड़े श्रम से इन उपन्यासों के सन्दर्भ में इन प्रश्नों को परखा है। प्रकट ही इस वजह से यह पुस्तक एक अनिवार्य सन्दर्भ ग्रन्थ बन गयी है।

About the writer

CHANDRAKANT VANDIVADEKAR

CHANDRAKANT VANDIVADEKAR डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर जन्म: 5 नवम्बर, 1932 (डोर्ले, रत्नागिरी, महाराष्ट्र) शिक्षा: एम.ए.; पीएच.डी. (बम्बई विश्वविद्यालय) प्रकाशित रचनाएँ: हिन्दी और मराठी के सामाजिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन; अज्ञेय की कविता: एक मूल्यांकन; उपन्यास स्थिति और गति; कविता की तलाश (केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा पुरस्कृत); जैनेंद्रजी के उपन्यास: मर्म की तलाश; आधुनिक हिन्दी उपन्यास: सृजन और आलोचना; मराठी कादंबरी: चिन्तन आणि समीक्षा (मराठी, महाराष्ट्र राज्य शासन एवं महाराष्ट्र साहित्य परिषद द्वारा पुरस्कृत); प्रेमचंद व्यक्ति आणि वाङ्मय (मराठी); मराठी कादंबरीचा इतिहास (मराठी); कथाकार अज्ञेय। अनुवादित ग्रंथ: चानी (चिंतक खानोलकर के मराठी उपन्यास का हिन्दी में अनुवाद, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा पुरस्कृत); ऑक्टोपस (श्री. नापेंडसे के मराठी उपन्यास का हिन्दी अनुवाद); सौंदर्य मीमांसा (डॉ. रा.भा. पारणकर के मराठी ग्रंथ का अनुवाद); इसी मिट्टी से (कुसुमाग्रज की कविताओं का अनुवाद); प्रेमचंद (प्रकाश चंद्र गुप्त की पुस्तक का मराठी अनुवाद)। संपादन: गोविन्द मिश्र: सृजन के आयाम; कथा भारती भाग-2; प्रेमचंद दृष्टि और सृष्टि; साहित्य और दलित चेतना; ज्ञानेश्वर जीवन और कार्य (माता कुसुम कुमारी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दीतर भाषी हिन्दी लेखक पुरस्कार-1992); समकालीन मराठी कहानी; हरिनारायण व्यास; कथा भारती (भारतीय कहानीकारों की कहानियों का संकलन)। अन्य प्रकाशन: हिन्दी और मराठी के 20 से अधिक संपादित ग्रंथों में लेख समाविष्ट; हिन्दी और मराठी की श्रेष्ठ पत्रिकाओं में 250 से अधिक लेख प्रकाशित। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से हिन्दी सेवा के लिए सौहार्द सम्मान पुरस्कार (1989)।

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