Samwad Chalta Rahe

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-413-4

Author:KRIPA SHANKAR CHAUBE

Pages:222


MRP : Rs. 175/-

Stock:In Stock

Rs. 175/-

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संवाद चलता रहे

Additional Information

कुछ पत्रों से सामयिक सन्दर्भो पर लेखकों की प्रतिक्रिया चयन करने की तुम्हारी शैली ज्ञानवर्धक तथा प्रशंसनीय है। पत्रकारिता के इस अंग में तुम्हारी शैली का महत्त्व है। -रामकुमार वर्मा इलाहाबाद, 22-8-1988 / आपकी कर्मठता और प्रतिभा दोनों से बहुत प्रभावित हूँ । आपसे हिन्दी को काफी अपेक्षाएं हैं। -शिवप्रसाद सिंह वाराणसी, 17-11-89 / तुम्हारे लेखन में मेरी रुचि बढ़ी है। हिन्दी के आलोचक जैसा मेरे बारे में, कहानियों के बारे में लिखते हैं, उनसे बेहतर हो तुम। -काशीनाथ सिंह वाराणसी, 25-3-1990 / अभी आज ही 'जनसत्ता' में, हावड़ा में हिन्दी की स्थिति पर आपकी टिप्पणी देखी। बहुत सही और तिलमिला देने वाले मुद्दे उठाए हैं आपने। पत्रकारिता का यह एक नया तेवर है, जिसे और धार देने की जरूरत है । इधर आप ध्यान दे रहे हैं यह देखकर अच्छा लगता है । –केदारनाथ सिंह नई दिल्ली, 2-7-94

About the writer

KRIPA SHANKAR CHAUBE

KRIPA SHANKAR CHAUBE जन्म : 1 जनवरी 1964, नछपरा गाँव, बलिया (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी, बांग्ला विधाएँ : आलोचना, निबंध और पत्रकारिता मुख्य कृतियाँ पत्रकारिता के उत्तर आधुनिक चरण, संवाद चलता रहे, रंग, स्वर और शब्द, महाअरण्य की माँ, मृणाल सेन का छायालोक, करुणामूर्ति मदर टेरेसा, समाज, संस्कृति और समय, नजरबंद तसलीमा, पानी रे पानी, चलकर आए शब्द, पत्रकारिता के नए परिदृश्‍य स्तंभलेखन : सन्मार्ग, लोकमत समाचार, दैनिक जागरण और अमर उजाला संपादनः बांग्ला मासिक भाषाबंधन तथा बांग्ला त्रैमासिक वर्तिका का अवैतनिक संपादन। सम्मान साहित्य अकादमी की जूनियर फेलोशिप संपर्क फ्लैट नंबर 306, सत्संग अपार्टमेंट, 400 जीटी रोड, हावड़ा-3

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