CHAND KA PAAR

Original Book/Language: इस काव्य-संग्रह में जापानी और हिन्दी कवियों द्वारा रचित 'चन्द्र-दर्शन' पर कुछ कविताएँ संकलित हैं । जापान में पारम्परिक विश्वास है कि जापान के पुराने कैलेण्डर के अनुसार आठवें महीने की पंद्रहवीं तारीख, यानी पूर्णमासी की रात को चन्द्र का दर्शन किया जाता है । साल में इसी दिन चाँद सबसे सुन्दर दिखता है और जापानवासी झुण्ड के झुण्ड एकत्रित होकर चाँद के छाँव में बैठ कर पारम्परिक भोजन करते है और चाँद की प्रंशसा पर गीत गाते हैं । पश्चिम कैलेण्डर के हिसाब से यह त्योहार सितम्बर या अक्टूबर में पड़ता है । इसे जापानी में 'ओत्सुकिमि' और हिन्दी में चन्द्र-दर्शन कहा जाता है । जापानी सभ्यता में पुष्प-दर्शन (विशेषत: वसंत में खिलने वाला सकुरा फूल), मोमिजि-दर्शन (विशेषत: मैपल के रंग-बिरंगे पत्ते) और हिम-दर्शन (शीत-ऋतु) के साथ-साथ चन्द्र-दर्शन का विशेष महत्त्व है । पूर्णमासी में खाया जाने वाला विशिष्ट भोजन होता है जिसमें सफेद चावल से बनाई गई त्सुकिमि दानगो ( मिठाई), सुसुकि घास और चस्टनट सम्मिलित हैं ।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-180-3

Author:RAJ BUDDHIRAJA, YOSHIO TAKAKURA

Translation:

Pages:

MRP:Rs.350/-

Stock:In Stock

Rs.350/-

Details

इस काव्य-संग्रह में जापानी और हिन्दी कवियों द्वारा रचित 'चन्द्र-दर्शन' पर कुछ कविताएँ संकलित हैं । जापान में पारम्परिक विश्वास है कि जापान के पुराने कैलेण्डर के अनुसार आठवें महीने की पंद्रहवीं तारीख, यानी पूर्णमासी की रात को चन्द्र का दर्शन किया जाता है । साल में इसी दिन चाँद सबसे सुन्दर दिखता है और जापानवासी झुण्ड के झुण्ड एकत्रित होकर चाँद के छाँव में बैठ कर पारम्परिक भोजन करते है और चाँद की प्रंशसा पर गीत गाते हैं । पश्चिम कैलेण्डर के हिसाब से यह त्योहार सितम्बर या अक्टूबर में पड़ता है । इसे जापानी में 'ओत्सुकिमि' और हिन्दी में चन्द्र-दर्शन कहा जाता है । जापानी सभ्यता में पुष्प-दर्शन (विशेषत: वसंत में खिलने वाला सकुरा फूल), मोमिजि-दर्शन (विशेषत: मैपल के रंग-बिरंगे पत्ते) और हिम-दर्शन (शीत-ऋतु) के साथ-साथ चन्द्र-दर्शन का विशेष महत्त्व है । पूर्णमासी में खाया जाने वाला विशिष्ट भोजन होता है जिसमें सफेद चावल से बनाई गई त्सुकिमि दानगो ( मिठाई), सुसुकि घास और चस्टनट सम्मिलित हैं ।

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