PACHAS KAVITAYEN - RAMDARASH MISHRA

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-825-6

Author:DR. RAMDARASH MISHRA

Pages:98

MRP:Rs.65/-

Stock:Out of Stock

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Details

पचास कविताएँ - रामदरश मिश्र

Additional Information

मेरा पहला काव्य संग्रह ‘पथ के गीत' सन् 1951 में प्रकाशित हुआ किन्तु मेरी काव्य यात्रा को सही दिशा उसके बाद प्राप्त हुई यानी नयी कविता के दौर में। नयी कविता से जब मैं जुड़ा तब मार्क्सवादी दृष्टि अपना चुका था। अपने गाँव तथा समाज से प्राप्त मेरे अनुभव को एक ठोस विचार-दृष्टि प्राप्त हो गयी थी किन्तु मेरी कविता किसी भी वाद के झंडे के नीचे नहीं आयी। वह समय के साथ चलती हुई नये अनुभवों, मूल्यों, प्रश्नों एवं शिल्पगत मुहावरों से सहज ही जुड़ती गयी। बुनियादी ज़मीन से जुड़ी रह कर उसने अपने को परिवर्तन की नवता के प्रति खुला रखा। क्रमशः आने वाले कविता-संग्रहों बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ, पक गयी है धूप, कन्धे पर सूरज, दिन एक नदी बन गया, जुलूस कहाँ जा रहा है, आग कुछ नहीं बोलती, बारिश में भीगते बच्चे, ऐसे में जब कभी, आम के पत्ते, कभी-कभी इन दिनों की कविताएँ समय-साहचर्य से उपजी कविताएँ हैं। प्रस्तुत संकलन (50 कविताएँ) में इन सभी संग्रहों से कविताएँ ली गयी हैं। वे मेरी बुनियादी ज़मीन के साथ निरन्तर परिवर्तन-क्रम की भी पहचान कराएँगी।

About the writer

DR. RAMDARASH MISHRA

DR. RAMDARASH MISHRA रामदरश मिश्र का जन्म 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर जिले के डुमरी गाँव में हुआ। इनके काव्य हैं - पथ के गीत, बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ, पक गई है धूप, कन्धे पर सूरज, दिन एक नदी बन गया, मेरे प्रिय गीत, बाजार को निकले हैं लोग, जुलूस कहाँ जा रहा है?, रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ, आग कुछ नहीं बोलती, शब्द सेतु, बारिश में भीगते बच्चे, हँसी ओठ पर आँखें नम हैं (ग़ज़ल), ऐसे में जब कभी, आम के पत्ते, तू ही बता ऐ ज़िन्दगी, हवाएँ साथ हैं, कभी-कभी इन दिनों, धूप के टुकड़े, आग की हँसी। इनके उपन्यास हैं - पानी के प्राचीर, जल टूटता हुआ, सूखता हुआ तालाब, अपने लोग, रात का सफर, आकाश की छत, आदिम राग, बिना दरवाजे का मकान, दूसरा घर, थकी हुई सुबह, बीस बरस, परिवार, बचपन भास्कर का। इनके कहानी संग्रह हैं - खाली घर, एक वह, दिनचर्या, सर्पदंश, बसन्त का एक दिन, इकसठ कहानियाँ, मेरी प्रिय कहानियाँ, अपने लिए, चर्चित कहानियाँ, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियाँ, आज का दिन भी, एक कहानी लगातार, फिर कब आएँगे?, अकेला मकान, विदूषक, दिन के साथ, मेरी कथा-यात्रा। इनके ललित निबन्ध हैं - कितने बजे हैं, बबूल और कैक्टस, घर परिवेश, छोटे-छोटे सुख। इनकी आत्मकथाएँ हैं - सहचर है समय, फुरसत के दिन। इनका यात्रावृत्त है - घर से घर तक देश यात्रा। इनकी डायरी हैं - आते-जाते दिन, आस-पास, बाहर-भीतर। 11 पुस्तकों पर समीक्षा लिखी है और 14 खंडों में इनकी रचनावली प्रकाशित हो चुकी है।

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