Ek Kavi Ko Mangani Hoti Hai Kshma, Kabhi Na Kabhi (Kavi Ka Gadya)

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-6078-60-0

Author:Edited by Nishikant & Kanupriya Devtale

Pages:272


MRP : Rs. 595/-

Stock:In Stock

Rs. 595/-

Details

एक कवि को माँगनी होती है क्षमा कभी न कभी (कवि का गद्य)

Additional Information

चन्द्रकान्त कवि-मनुष्य हैं। उनकी सोच कविता की सोच है, उनकी दृष्टि कविदृष्टि है। उनकी ऊर्जा का केन्द्र कविता है। विषय चाहे जो भी हो, चन्द्रकान्त उसे अपने अन्तस की रोशनी में ही देखते-परखते हैं। कविता की रोशनी से ही कोई भी विषय, विचार, विधान आलोकित होता है। केन्द्र में कविता है। वह विचारधारा की तरह चश्मा नहीं है। कविता की दृष्टि से देखने पर दृष्टिकोण ही बदल जाता है। जीवन का साक्षात्कार कविता की भाषा से होता है वैसा आम भाषा से नहीं होता। कवि का गद्य भी इस सही भाषा की तलाश है। वह नया नज़रिया देता है ज़िन्दगी और दुनिया को देखने का। चन्द्रकान्त का गद्य यही करता है इसलिए भी उसे कवि का गद्य कहना वाज़िब लगता है। कवि का गद्य वह होता है जिसमें कवि के व्यक्तित्व की सहज प्रतीति होती है, चन्द्रकान्त के गद्य में ईमानदारी, पारदर्शिता, सह-अनुभव और दोस्ती के अन्दाज़ की गन्ध है। साफ़गोई, संवेदनशीलता, सहजता, विनोदप्रियता, अपनापा आदि गुणों ने उसमें चार चाँद लगाये हैं। वह अपने जीवन में और जीवन के ख़ास क्षणों में पाठक या श्रोता को शामिल कर विश्वास जगाते हैं। यह अन्तरंगता इस गद्य को कवि का गद्य बना देती है, कवि के साथ वह चिन्तक, अध्यापक, श्रोता, वक्ता, पति, पिता, पुत्र, भाई, मित्र, चित्रकार, रसिक, शिष्य, गुरु, नागरिक आदि कई रूपों में हमारे सामने आते हैं और दिमाग़ पर छा जाते हैं। बिना गम्भीरता और सभ्यता को खोये। -भूमिका से

About the writer

Edited by Nishikant & Kanupriya Devtale

Edited by Nishikant & Kanupriya Devtale निशिकान्त ठकार (जन्म : 11 जून 1935) हिन्दी तथा मराठी के आलोचक तथा सुविख्यात अनुवादक हैं। वे लगभग 38 वर्षों तक हिन्दी के महाविद्यालयीन अध्यापक रहे हैं। अब तक उनकी 60 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें से 26 हिन्दी में तथा 34 मराठी में हैं। दोतरफ़ा अनुवादक होने के नाते उन्होंने हिन्दी और मराठी में 20-20 अनुवाद किये हैं। उनके द्वारा किये गये अरुण कोलटकर के जेजुरी तथा द्रोण के हिन्दी अनुवाद काफ़ी चर्चित रहे हैं। इनके अलावा उन्होंने श्याम मनोहर, ना. धो. महानोर, चन्द्रकान्त पाटील, अरुण खोपकर, अनुराधा पाटील, शरणकुमार लिंबाले आदि लेखक-कवियों की रचनाएँ हिन्दी में तथा ग़ालिब, सआदत हसन मंटो, दिलीप पुरुषोत्तम चित्रे, पवनकुमार वर्मा, ओ.एन.व्ही. कुरुप, चन्द्रशेखर कम्बार, कृष्णा सोबती, विनोदकुमार शुक्ल, एच. एस. शिवप्रकाश आदि अन्य भारतीय लेखकों की रचनाएँ मराठी में अनूदित की हैं। नौकर की कमीज़ के मराठी अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी का पुरस्कार, महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादेमी के मुक्तिबोध पुरस्कार के अतिरिक्त अब तक उन्हें 15 राष्ट्रीय तथा राज्यस्तरीय पुरस्कारों तथा जीवनगौरवों से नवाज़ा गया है। हाल ही में उन्होंने नामदेव ढसाळ की 100 कविताओं का हिन्दी अनुवाद पूरा किया है। सम्पर्क : द्वारा : चन्द्रकान्त पाटील, ए-501, ऋतुरंग अपार्टमेंट, कोथरुड, पुणे-411038 मो. : 9823939946 / कनुप्रिया देवताले जन्म : इन्दौर (म.प्र.)। शिक्षा : विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से। पर्यावरण और पशु कल्याण गतिविधियों में सक्रियता। सम्प्रति : राजनीति विज्ञान विषय में महाविद्यालयीन प्राध्यापक। सम्पर्क : एफ-2/7, शासकीय आवास, माधव नगर, उज्जैन (म.प्र.)। मो. : 9165010009

Books by Edited by Nishikant & Kanupriya Devtale

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality