HINDI GHAZAL KI BHASHIK SANRACHNA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-172-1

Author:DR. SARDAR MUJAVAR

Pages:

MRP:Rs.300/-

Stock:Out of Stock

Rs.300/-

Details

हिन्दी गश्जश्ल न तो उर्दू गश्जश्ल की नकल है और न उसका अनुकरण। यह वस्तुतः एक स्वतंत्रा और समानांतर विधा है। उर्दू गश्जश्ल से उसने बहुत कुछ सीखा है, लेकिन उसकी भाषिक संरचना नितांत अपनी है। लगभग सात वर्ष की मेहनत के बाद सरदार मुजावर ने यह पुस्तक लिखी है, जिसमंे हिन्दी गश्जश्ल की भाषिक संरचना की विस्तार से व्य्ााख्या की गई है। जिन महत्वपूर्ण प्रश्नों को इस शोध कृति मंे उठाया गया है, वे हैं µ हिन्दी गश्जश्ल की भाषा का स्वरूप कैसा है? उसमंे किन मुहावरांे और कहावतांे का प्रयोग किया गया है? किन-किन प्रतीकांे और बिंबांे का इस्तेमाल हुआ है? हिन्दी गश्जश्लांे मंे प्रयुक्त छंदांे पर विचार इस पुस्तक की एक और विशेषता है। वह गश्जश्ल ही क्य्ाा जो गाई न जा सके? इसलिए विद्वान लेखक ने हिन्दी गश्जश्ल और संगीत के घनिष्ठ संबंध पर भी प्रकाश डाला है। इस संदर्भ मंे गश्जश्ल गायकी ने हिन्दी गश्जश्लांे की संरचना को किस तरह प्रभावित किया है, इसका भी अध्य्ायन किया गया है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जो कुछ कहा गया है, पर्याप्त उदाहरणांे के साथ कहा गया है। आशा है कि मुजावर की यह कृति हिन्दी गश्जश्ल मंे रुचि रखनेवाले सभी वर्गों के लिए अत्य्ांत उपयोगी होगी।

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About the writer

DR. SARDAR MUJAVAR

DR. SARDAR MUJAVAR जन्म: 5 मई 1953, कोल्हापुर, महाराष्ट्र, शिक्षा: एम.ए., डी.लिट्., प्रकाशित पुस्तकें: हिन्दी गश्जश्ल के विविध आयाम; हिन्दी गश्जश्ल की नई दिशाएँ; हिन्दी गश्जश्ल µ गश्जश्लकारों की नजर में; हिन्दी गश्जश्ल का वर्तमान दशक; दुष्यन्त कुमार की गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन; झरोखे से झाँकता चाँद; हिन्दी की छायावादी गश्जश्ल। यू.जी.सी. बृहद् शोध परियोजनाएँ: हिन्दी में गश्जश्ल की अवधारणा, विकास और उसका मूल्यांकन; राष्ट्रीय एकता के परिप्रेक्ष्य में हिन्दी गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन; हिन्दी में दोहा काव्यµएक साहित्यिक एवं सामाजिक अध्ययन। यू.जी.सी. लघु-शोध परियोजनाएँ: महाराष्ट्र में हिन्दी दशा एवं दिशा; दुष्यन्त कुमार की गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन। पुरस्कार एवं सम्मान: महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का वर्ष 2007 का बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार; पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलांग (मेघालय) का वर्ष 2008 का पुरस्कार; अखिल भारतीय साहित्य संगम, उदयपुर (राज.) का साहित्य-सरताज पुरस्कार; शिवाजी विश्वविद्यालय का आदर्श शिक्षक पुरस्कार; युवा समूह प्रकाशन, वर्धा का राज्य स्तरीय गौरव पुरस्कार। संप्रति: अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, स्नातक एवं स्नातकोत्तर केन्द्र, किसन वीर महाविद्यालय, वाई, जिला सतारा (महाराष्ट्र)। सम्पर्क: ‘गश्जश्ल’, धोम कालोनी के पश्चिम में सिद्धनाथबाड़ी, वाई-412803, सतारा (महाराष्ट्र)।

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