HINDI GHAZAL : GHAZALKARON KI NAZAR MAIN

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-751-8

Author:DR. SARDAR MUJAVAR

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MRP:Rs.175/-

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Rs.175/-

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‘ग़ज़ल’ हिन्दी की अपनी चीज नहीं है। वह फारसी-उर्दू के जरिए हिन्दी में आयी है। ग़ज़ल प्रेम, शृंगार, रूपासक्ति, मिलन, विरह के भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम रही है, लेकिन धीरे-धीरे जिन्दगी के यथार्थ ने ग़ज़ल में पनाह लेना शुरू किया और आज तो यह व्यंग्य-लेखन की तरह विसंगतियों एवं विरोधाभासों पर चोट करने का माध्यम बनती जा रही है। नयी कविता की छन्दमुक्तता, गद्यमयता और सपाट बयानी ने पाँचवें-छठे दशक के आस-पास जो बौद्धिक नीरसता उत्पन्न कर दी थी उससे निज़ात दिलाने का काम ग़ज़ल ने किया। इसी समय संगीत और गायकी की दुनिया में ग़ज़ल का बोलबाला बढ़ा। गुलाम अली, जगजीत सिंह, अनूप जलोटा,पंकज उधास आदि गायकों ने उर्दू शायरों की ग़ज़लों को घर-घर में गुँजा दिया। यह वही समय है जब दुष्यन्त कुमार ने स्वयं को ग़ज़ल-रचना में पूरी तरह गर्क कर दिया और ‘यहाँ साए में धूप लगती है’ शीर्षक उनके ग़ज़ल-संग्रह ने भी बहुत लोकप्रियता अर्जित की। यदि दुष्यन्त कुमार अपनी प्रभावशाली ग़ज़लों के कारण हिन्दी कविता पर छा न गये होते तो नये कवियों का ध्यान एकमात्र ग़ज़ल को अपनाने की ओर न जाता। दुष्यन्त कुमार ने उर्दू मुहावरे के बहुत करीब जाकर अपनी ग़ज़लों में वह विषय-वस्तु भरी जो आज की कविता के लिए अनिवार्य थी। लोकतन्त्र की आड़ में अलोकतान्त्रिक क्रियाकलाप, गरीबी, भ्रष्टाचार, तानाशाही, ढोंग, आडम्बर, युद्ध क गहराते बादल, मानव-मूल्यों का द्दास, विज्ञान का दुरुपयोग-ये सारी बातें उनकी ग़ज़लों के कथ्य बनती हैं। आज की ग़ज़ल गायकी मंें हिन्दी ग़ज़ल का स्थान बन चुका है साथ ही हिन्दी ग़ज़ल का अस्तित्व अनजान नहीं रह गया है।

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About the writer

DR. SARDAR MUJAVAR

DR. SARDAR MUJAVAR जन्म: 5 मई 1953, कोल्हापुर, महाराष्ट्र, शिक्षा: एम.ए., डी.लिट्., प्रकाशित पुस्तकें: हिन्दी गश्जश्ल के विविध आयाम; हिन्दी गश्जश्ल की नई दिशाएँ; हिन्दी गश्जश्ल µ गश्जश्लकारों की नजर में; हिन्दी गश्जश्ल का वर्तमान दशक; दुष्यन्त कुमार की गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन; झरोखे से झाँकता चाँद; हिन्दी की छायावादी गश्जश्ल। यू.जी.सी. बृहद् शोध परियोजनाएँ: हिन्दी में गश्जश्ल की अवधारणा, विकास और उसका मूल्यांकन; राष्ट्रीय एकता के परिप्रेक्ष्य में हिन्दी गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन; हिन्दी में दोहा काव्यµएक साहित्यिक एवं सामाजिक अध्ययन। यू.जी.सी. लघु-शोध परियोजनाएँ: महाराष्ट्र में हिन्दी दशा एवं दिशा; दुष्यन्त कुमार की गश्जश्लों का समीक्षात्मक अध्ययन। पुरस्कार एवं सम्मान: महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का वर्ष 2007 का बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार; पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलांग (मेघालय) का वर्ष 2008 का पुरस्कार; अखिल भारतीय साहित्य संगम, उदयपुर (राज.) का साहित्य-सरताज पुरस्कार; शिवाजी विश्वविद्यालय का आदर्श शिक्षक पुरस्कार; युवा समूह प्रकाशन, वर्धा का राज्य स्तरीय गौरव पुरस्कार। संप्रति: अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, स्नातक एवं स्नातकोत्तर केन्द्र, किसन वीर महाविद्यालय, वाई, जिला सतारा (महाराष्ट्र)। सम्पर्क: ‘गश्जश्ल’, धोम कालोनी के पश्चिम में सिद्धनाथबाड़ी, वाई-412803, सतारा (महाराष्ट्र)।

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