BAT BANI RAHE

Format:Hard Bound

ISBN:

Author:ANIL SHRIVASTAV

Pages:96

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

बात बनी रही

Additional Information

बात बनी रहे यह काव्य-संग्रह अपने समय की साँसत को रेखांकित करने के क्रम में ही अनागत संकट और मनुष्य की अपरिमित संभावनाओं को भी रूपायित करता है । एकसरता, ऊब, खीझ, बेचैनी के सातत्य को तोड़ने की कोशिश और तोड़कर नया कुछ बनाने की दृष्टि इन कविताओं में निरंतर मिलती हैं । कविताओं में पाया जाने वाला भावावेग अपने समय को परिभाषित करने के क्रम में चिन्तनशीलता से जुड़कर कविता के अर्थवृत को विस्तृत करता है। इस संकलन में लम्बी और छोटी कविताएँ कवि के काव्य-कौशल और उसकी अभिव्यंजना क्षमता को प्रमाणित करती है कविताओं में अपने समय की काव्यरीति के विरुद्ध खड़े होने का दम-खां भी है और अपने विश्वास के प्रति दृढ़ता भी रचनाओं में सर्वत्र मनुष्य की नियति और स्थिति के नाज़ुक रिश्ते को गहराई से सम्प्रेषित कर सकने की कोशिश है कविता को रूढ़ लयात्मकता और समयों को तोड़ने की कोशिश शिल्प के स्तर पर नवीनता पैदा करने के साथ ही परिपक्वता का अहसास पैदा करती है ।

About the writer

ANIL SHRIVASTAV

ANIL SHRIVASTAV जन्म : 10 जून 1952, इलाबाद में । शिक्षा : बी.ए. तक । व्यवसाय : इंडियन टेलीफोन इण्डस्ट्रीज, नैनी, इलाहाबाद में वरिष्ठ सहायक । कृतियाँ : एक बाल उपन्यास तथा एक कविता बुलेटिन पूर्व प्रकाशित । सम्पादन : ‘साप्ताहिक डायरी’(समाचार पत्र ) तथा कविता पत्रिका ‘समकालीन कविता’ का 1973 से 1976 तक । साथ ही प्रमोद सिन्हा के संपादन काल में ‘नयी कहानियाँ’ का सह-संपादन । संप्रति, ‘कथ्य-रूप’ साहित्यिक पत्रिका का संपादन कर रहे हैं । यह पहला कविता संग्रह है ।

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