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    Date: 19-12-2019

    'प्रेम-कविता भी राजनीतिक हो सकती है'

    अदिति माहेश्वरी

    75 के हो रहे नन्दकिशोर आचार्य के कविता संग्रह 'छीलते हुए अपने को' केंद्रीय साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। उनकी कविताएँ नए आयाम देती रही हैं और प्रेम में भी वो राजनीति प्रभावी तरह से खोज लेते हैं । अंग्रेजी साहित्य, रंगमंच और इतिहास के विशेषज्ञ आचार्य के पंद्रह कविता-संग्रह, आठ नाटक,आठ साहित्यिक आलोचना की पुस्तकें एवं संस्कृति, शिक्षा, राजनीतिक-आर्थिक चिन्तन, मानवाधिकार एवं गाँधी दर्शन पर केन्द्रित चौदह पुस्तकें उनकी समर्थता को साबित करती रही हैं। प्रकृति, प्रेम, राजनीति और मानव केंद्रित अध्यात्म को अपनी लेखन प्रक्रिया का आधार बना कर लिखने वाले आचार्य साहित्य अकादेमी पुरस्कार पाने वाले भले ही 26 वे कवि हों पर उनकी प्रतिष्ठा की कतार काफी पहले की हकदार है।

    आचार्य मानते हैं कि कविता को साहित्य अकादेमी से फ़िर से पुरस्कृत करना सुखद है। हर कवि समाज को दो स्तरों पर समझने की कोशिश करता है। वर्तमान में घट रही घटनाओं को वास्तविकता में समझना एक तरीका है। लेकिन तत्काल को इतिहास और साहित्य की दृष्टि और अध्यात्म के दर्शन से समझना कवि का कर्तव्य है। उनका मानना है कि कवि की तत्वमीमांसक (मेटाफिज़िकल) समझ ही उसे भूत, वर्तमान और भविष्य के बीच सामंजस्य बिठाने में मदद करती है इसलिए कवि की पाठन सामग्री बहुआयामी होनी अनिवार्य है। आचार्य स्वंय उर्दू में ग़ालिब और हिन्दी में अज्ञेय से प्रभावित रहे हैं।

    वरिष्ठ कवि Anamika Anamika का मानना है कि आज हर व्यक्ति खुद से ही संवाद करना भूल गया है, वहाँ आचार्य की कविता इस टूटे संवाद को पुनः स्थापित करती है।जीवन और उसके तमाम रंगों से लबरेज़ कवितायेँ इस संबंध को सुलभ बनाती हैं। वरिष्ठ कला आलोचक और कवि प्रयाग शुक्ल मानते हैं कि नंदकिशोर आचार्य की कविता का 'स्थापत्य' स्वयं कम दिलचस्प नहीं है- इसमें ठेठ गद्य की लय और गीति-तत्व का अनोखा मेल है। सामाजिक चिंतक व कवि अशोक वाजपेयी का मानना रहा है कि आचार्य की अपनी आवाज़ है जो ध्यान और मनन की माँग करती है। याद रखना होगा कि अनेक विधाओं में सृजनशील आचार्य पूर्व में मीरा पुरस्कार, बिहारी पुरस्कार, भुवनेश्वर पुरस्कार, राजस्थान संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किये गए हैं। 'गाना गाता पतझड़', 'सभ्यता का विकल्प', 'अहिंसा की संस्कृति: आधार और आयाम' समकालीन परिपेक्ष्य में नन्दकिशोर आचार्य की महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं। आचार्य की किताबों का लगभग 15 वर्षों से प्रकाशन करते आ रहे वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि हिन्दी भाषा को वैश्विक, आधुनिक और बौद्धिक सोच से जोड़ने का कार्य आचार्य जैसे विद्वान् ही कर सकते हैं। उनका लिखा युवा पीढ़ी के लिए धरोहर है।

    राजस्थान के वरिष्ठ लेखक Nand Bhardwaj ने गाँधीवादी विचारधारा के अनुयायी आचार्य को युवाओं के लिए ख़ास तौर पर प्रासंगिक माना। भारद्वाज ने इस मौके पर कहा कि विश्व साहित्य के अध्ययन ने आचार्य के लिए व्यापक पृष्ठभूमि का निर्माण किया है जो उनकी मानवीय लेखनी को सदैव नयी पटल प्रदान करती है। आचार्य ने जापानी ज़ेन कवि रियोकान के काव्यानुवाद 'सुनते हुए बारिश', जोसेफ़ ब्रादस्की, ब्लादिमीर होलेन, लोर्का के अनुवाद भी प्रकाशित किये हैं। रचनाशीलता के साथ 'कल्चर पॉलिटी ऑफ़ थे हिन्दूज़' और 'पॉलिटी इन शुक्रनीतिसार' जैसी वैचारिक पुस्तकों का प्रबंधन भी किया है।

    युवा कवि Veeru Sonker ने नंदकिशोर आचार्य के बारे में कहा कि वह 'दृश्यों के पार' भी अपनी विषय चेतना को सजग रखते हैं और आदिम प्रतीकों के सहारे अपने समय की कविता को शब्द देना इस कवि को विशिष्ठ बनाता है. निश्चित तौर पर उनकी कविताएँ किसी कालखंड विशेष तक सीमित नहीं रहने वाली हैं . राजस्थान फोरम के संस्थापक @Sundeep Bhutoria ने इस मौके पर माना कि नन्दकिशोर आचार्य का केंद्रीय साहित्य अकादेमी पुरस्कार जीतना राजस्थान के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओँ में रचनात्मक लेखन का आदर करने वाले सभी लोग इस पुरस्कार का स्वागत करते हैं।


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