Book Review | Samay Patrika | Pyar Ka Pahle Khat by Hastimal 'Hasti'


    Date: 6-8-2018

    हस्तीमल ‘हस्ती’ की ग़ज़लों में आदमी की खुद्दारी की लौ जहाँ-तहाँ दिखती है। हालात पर खीझ है, गुस्सा है, पर उसे ललकारने की कूवत भी है। प्रेरणा भीतर से देते हैं वे। ग़ज़ल दो पंक्तियों में दस-बीस पन्ने की संवेदना उतार देती है। कम शब्दों में सच्चाई, ईमानदारी, समझदारी की बात ‘हस्ती’ की ग़ज़लों की विशेषता है। वे हर उलझन से बाहर आने की तरकीब भी सुझाते हैं, आत्मीय सलाह भी देते हैं –

    किस जगह रास्ता नहीं होता
    सिर्फ हमको पता नहीं होता
    बरसों रुत के मिज़ाज सहता है
    पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता
    http://kitab.samaypatrika.com/2018/08/pyar-ka-pehla-khat-hastimal-hasti.html#.W2asWLuHJhw.facebook

    << Back to Media News List