Book Review | Pyar Ka Pahla Khat


    Date: 10-8-2018

    “…हस्तीमल ‘हस्ती’ की ग़ज़लों में प्रेम के व्यक्तिगत अहसास से लेकर सामूहिक प्रेम तक की काफी सशक्त, गहरी और संवेदी अभिव्यक्ति है। इन ग़ज़लों में हालात पर खीज है, आक्रोश है, गुस्सा है तो उन्हें ललकारने की कूव्वत भी है। बहुत कम शब्दों में वे सच्चाई, ईमानदारी, समझदारी और सादगी की बात करते हैं। वे सियासत के नरभक्षी दौर पर भी तीखा तंज कसते हैं…”
    https://satyagrah.scroll.in/article/118527/book-review-pyar-ka-pahla-khat-hastimal-hasti

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